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Waiting Hai Review: तत्काल टिकट का काला खेल, मुन्ना भैया से पुलिसवाले बने दिव्येंदु, 'वेटिंग है' में दिखा दम?

‘Waiting Hai’ में तत्काल टिकट के खेल को क्राइम कहानी से जोड़ा गया है. मिर्जापुर में मुन्ना भैया बन भौकाल मचा चुके दिव्येंदु यहां पुलिसवाले बने हैं. तो आइये आपको बताते हैं ये सीरीज कैसी है.

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कैसी है वेटिंग है सीरीज? (Photo: Screengrab)
कैसी है वेटिंग है सीरीज? (Photo: Screengrab)
फिल्म:स्कैम ड्रामा
3/5
  • कलाकार : दिव्येंदु, भुवन अरोड़ा, सुनीता राजवार, हर्षिता गौर
  • निर्देशक :समीर विद्वंस

भारतीय रेलवे में कन्फर्म टिकट मिल जाना अपने आप में किसी उपलब्धि से कम नहीं और अगर बात तत्काल की हो, तो मामला और भी दिलचस्प हो जाता है. कुछ सेकेंड की देरी और टिकट हाथ से गया. 'वेटिंग है’ इसी रोजमर्रा की परेशानी को उठाकर उसे एक क्राइम ड्रामा में बदलने की कोशिश करती है. पटना की पृष्ठभूमि में बनी सात एपिसोड की यह सीरीज टाटकल टिकट के पीछे चल रहे कथित खेल, टेक्नोलॉजी और लालच की कहानी दिखाती है.

मेरे हिसाब से MX प्लेयर पर स्ट्रीम हो रही इस सीरीज का आइडिया काफी दिलचस्प है और सीरीज में हंसी, इमोशन और सस्पेंस भी है, लेकिन कमजोर और बेमेल राइटिंग इसकी सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है. कई जगह लगता है कि कहानी कुछ बड़ा करने वाली है, लेकिन फिर अचानक दूसरी दिशा में निकल जाती है. 

बाकी की बड़ी बातें आगे रिव्यू में पढ़ें...

तत्काल टिकट से शुरू होता है बड़ा खेल

कहानी है सुगम मिश्रा (यानी मिर्जापुर वाले दिव्येंदु शर्मा) की, जो नया-नया RPF कांस्टेबल बना है. नौकरी के साथ नई शादी और घर की जिम्मेदारियों के बीच सुगम अपने पिता की याद और उनकी उम्मीदों को भी अपने साथ लेकर चलता है.

ड्यूटी के दौरान उसे एक अजीब पैटर्न नजर आता है. आम आदमी तत्काल टिकट के लिए जूझ रहा है, लेकिन कुछ एजेंट बड़ी आसानी से टिकट हासिल कर रहे हैं. सुगम को मामला गड़बड़ लगता है और अपनी काबिलियत साबित करने के लिए वह इसकी तह तक जाने लगता है.

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यहीं से कहानी पहुंचती है अफरोज हम्सा (दुपहिया सीरीज वाले भुवन अरोड़ा) तक. कंप्यूटर का हुनर रखने वाला यह लड़का रेलवे के टिकटिंग सिस्टम में सेंध लगाने का तरीका खोज लेता है. शुरुआत में मकसद कुछ खास बड़ा नहीं है, लेकिन लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश और फिर बेइज्जती उसके फैसलों को बदल देती है. इसके बाद उसके मामा (विजय मौर्या) उसे इसी हुनर से पैसा कमाने का रास्ता दिखाते हैं. और देखते ही देखते अफरोज एक बड़े टिकटिंग रैकेट का हिस्सा बन जाता है.

दिव्येंदु और भुवन की टक्कर दिलचस्प है

‘Waiting Hai’ की सबसे अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ पुलिस बनाम अपराधी की कहानी नहीं रह जाती. सुगम और अफरोज दोनों अपनी-अपनी मजबूरियों से लड़ रहे हैं. सुगम सिस्टम के अंदर रहकर सही काम करना चाहता है, लेकिन उसे समझ आता है कि नौकरी में ईमानदारी और सिस्टम के दबाव के बीच संतुलन बनाना इतना आसान नहीं है. दूसरी तरफ अफरोज एक ऐसा लड़का है, जो शुरुआत में अपने टैलेंट का इस्तेमाल एक छोटी-सी जरूरत के लिए करता है और धीरे-धीरे पैसे और लालच के जाल में फंसता चला जाता है.

भुवन अरोड़ा अफरोज के रोल में खासे जमे हैं. उनके किरदार में जो बदलाव आता है, वह अचानक नहीं लगता. वहीं दिव्येंदु शर्मा सुगम को एक आम और थोड़ा परेशान पुलिसवाला बनाते हैं, जो हर सवाल का जवाब नहीं जानता. यही बात उनके किरदार को ज्यादा ह्यूमन एंगल देती है.

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मिर्जापुर कनेक्शन भी करेगा यादें ताजा

सीरीज में दिव्येंदु की पत्नी का किरदार हर्षिता गौर निभा रही हैं, जबकि पंचायत और गुल्लक सीरीज फेम सुनीता राजवार उनकी मां के रोल में हैं. हर्षिता को दर्शक ‘मिर्जापुर’ में गुड्डू पंडित यानी अली फजल की बहन डिंपल के किरदार में देख चुके हैं. वहीं दिव्येंदु इसी सीरीज में कालीन भैया के बेटे मुन्ना त्रिपाठी के रोल से घर-घर में मशहूर हुए थे.

‘Waiting Hai’ में हर्षिता का किरदार सिर्फ घर संभालने वाली पत्नी बनकर नहीं रह जाता, उन्हें अपनी जगह और स्पेस दिया गया है. घरेलू हिस्सों में सीरीज को थोड़ा इमोशनल टच भी मिलता है.

यहीं कमजोर पड़ जाती है कहानी

जहां आइडिया मजबूत है, वहीं राइटिंग हर जगह उसका साथ नहीं दे पाती. तत्काल स्कैम अपने आप में इतना मजेदार विषय है कि इसे ज्यादा घुमाने की जरूरत ही नहीं थी. लेकिन सीरीज बीच-बीच में ऐसे ट्रैक पकड़ लेती है, जो मुख्य कहानी से कटे हुए लगते हैं.

कई सीन ऐसे महसूस होते हैं जैसे कहानी का हिस्सा कम और अलग से बनाए गए सोशल मीडिया स्केच ज्यादा हों. एक गंभीर इमोशनल सीन के तुरंत बाद हल्की या बचकानी कॉमेडी आ जाना भी कई बार खटकता है. शुरुआती एपिसोड थोड़ा वक्त लेते हैं, लेकिन बाद के हिस्से में कहानी रफ्तार पकड़ती है. जैसे-जैसे सुगम की जांच आगे बढ़ती है और अफरोज का किरदार बदलता है, सीरीज में वह टेंशन आती है जिसकी उम्मीद शुरुआत से थी.

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देखें या छोड़ दें?

‘Waiting Hai’ कोई परफेक्ट स्कैम थ्रिलर नहीं है, लेकिन इसका आइडिया आपको बांधे रखने के लिए काफी है. तत्काल टिकट की परेशानी वो है जिससे मिडिल क्लास इंसान अक्सर जूझता है. वहीं इसे क्राइम की दुनिया से जोड़ना दिलचस्प एक्सपेरिमेंट है. दिव्येंदु शर्मा और भुवन अरोड़ा अपनी-अपनी भूमिकाओं में भरोसा जगाते हैं और हंसी-इमोशन-सस्पेंस के कुछ अच्छे पल भी मिलते हैं.

बस दिक्कत यह है कि कहानी कई बार अपनी ही पटरी से उतर जाती है. अगर राइटिंग थोड़ी और कसी हुई होती, तो ‘Waiting Hai’ एक शानदार स्कैम ड्रामा बन सकती थी. फिलहाल यह एक ठीक-ठाक, दिलचस्प लेकिन अधूरी क्षमता वाली सीरीज है.

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