scorecardresearch
 

दूर नहीं हो रही परिसीमन बिल पर अड़चन, मोदी सरकार के सामने हैं ये दो ऑप्शन

लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण और लोकसभा की सीटें बढ़ाने वाले परिसीमन बिल को मोदी सरकार पास कराने की दिशा में फिर से कदम बढ़ाने जा रही है, लेकिन इस राह में कई सियासी अड़चने हैं. ऐसे में सरकार के सामने दो विकल्प है.

Advertisement
X
दो-तिहाई बहुमत के जुगाड़ में मोदी सरकार (Photo-ITG)
दो-तिहाई बहुमत के जुगाड़ में मोदी सरकार (Photo-ITG)

संसद का मॉनसून सत्र शुरू 20 जुलाई को शुरू हुआ तो सबके मन नें एक ही सवाल था कि परिसीमन बिल कब आएगा. संसद का तीन सप्ताह हंगामें के बीच बीत गया, लेकिन परिसीमन बिल नहीं आया. अब महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर नया अपडेट आया, मोदी सरकार ने 13 अगस्त को समाप्त हो रहे मॉनसून सत्र को अगले तीन दिन के लिए बढ़ाने का प्लान बनाया है. 

मोदी सरकार अब फिर से परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को संसद में लाने की तैयारी की है. संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने के बाद सरकार ने अगले तीन दिन के लिए विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है. इस विशेष सत्र में परिसीमन बिल को पारित कराने के दिशा में कदम बढ़ाएगी, लेकिन इस राह में अभी भी कई सियासी अड़चने हैं.

महिला आरक्षण को 2029 में लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने वाले परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कवायद सरकार ने तेज कर दी है. अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में ये बिल गिर गया था, क्योंकि सरकार नंबर गेम में पीछे रह गई थी. अप्रैल से अगस्त आते-आते संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की संरचना में बदलाव आ चुका है, लेकिन क्या सरकार संविधान बदलाव के लिए नंबर गेम जुटा लिया है. 

Advertisement

मॉनसून सत्र परिसीमन बिल क्यों नहीं आ सका
संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले तय माना जा रहा था कि मोदी सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने की दिशा में अपने कदम बढ़ाएगी. इसकी वजह टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा सांसदों की बगावत रही, जिसके चलते मोदी सरकार का संसद में नंबर गेम बेहतर हुआ है. ऐसे में माना जा रहा था कि सरकार इस दिशा में अपने कदम आगे बढ़ाएगी. 

पेपर लीक के मुद्दे पर छात्र आंदोलन के चलते मोदी सरकार के सारे मंसूबों पर पानी फिर गया. मॉनसून सत्र के शुरूआती तीन सप्ताह हंगामे के भेंट चढ़ गए, विपक्ष राम मंदिर के चंदा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और जंतर-मंतर पर छात्रों हुए पुलिस एक्शन पर अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहा है. इसके चलते संसद का सत्र नहीं चल पा रहा, जिसके चलते मोदी सरकार ने परिसीमन बिल को पेस नहीं किया. 

अब मोदी सरकार ने परिसीमन बिल को लाने का प्लान बनाया है, जिसके लिए संसद के मॉनसून सत्र को तीन दिन बढ़ाने की रणनीति है. सरकार 17 अगस्त से तीन दिन का विशेष सत्र बुला सकती है. सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार ने परिसीमन संशोधन बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की संख्या जुटाने पर काम शुरू कर दिया है. 

Advertisement

दो-तिहाई बहुमत से कितने दूर मोदी सरकार
माना जा रहा है कि दो-तिहाई समर्थन मिलते ही सरकार विशेष सत्र बुलाने का फैसला कर सकती है. अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि बिल पास कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत थी. इसके चलते बिल पास नहीं हो सका था, पर अब स्थिति बदली है. इसके बाद भी सरकार अभी भी नंबर गेम से पीछे हैं. 

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, क्योंकि इन दोनों विधेयक संविधान संशोधन के जरिए हो सकता है. लोकसभा में कुल 543 सीटों में से 3 सीटें खाली हैं. इस तरह लोकसभा के 540 सदस्यों में से दो-तिहाई के लिए 360 सांसदों का समर्थन चाहिए.

हालांकि, बदले हुए सियासी समीकरण में बीजेपी का नंबर गेम पहले से मजबूत हुआ है. बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है. तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों का समर्थन मोदी सरकार को है. इसके अलावा उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं.

इस तरह मोदी सरकार के समर्थन में सांसदों की संख्या 319 हो रही है. इसके अलावा वाईएसआरसीपी के 4 और 1 निर्दलीय को मिलाकर यानि 5 सांसदों का समर्थन पहले से हैं, उन्हें मिला देते हैं तो फिर यह आंकड़ा 324 पहुंच जा रह है.

Advertisement

मोदी सरकार के दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन चाहिए. ऐसे में सरकार की नजर डीएमके के 22 सांसदों और शरद पवार की पार्टी के 8 सांसदों पर है. सरकार अगर डीएमके का समर्थन जुटा लेती है तो फिर बिल आसानी से पास हो जाएगा, लेकिन डीएमके के तेवर बदल नहीं रहे हैं. 

मोदी सरकार के सामने दो विकल्प 
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को पास कराने के लिए मोदी सरकार के पास दो विकल्प हैं. पहला विकल्प लोकसभा और राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का नंबर जुटा ले. सरकार फिलहाल नंबर गेम जुटाने में सफल नहीं हो पा रही है, जिसके चलते ही मॉनसून सत्र में संविधान संसोधन विधेयक नहीं ला सकी. 

सरकार के सामने दूसरा विकल्प आपसी सहमति से बिल को पास कराने का है, जिस तरह महिला आरक्षण विधेयक को 2024 के चुनाव से पहले सरकार ने पास कराया था. सरकार को परिसीमन बिल के मुदेदे पर विपक्ष का रंजामंद होने जरूरी है. विपक्षी दलों की परिसीमन के मुद्दे पर अपनी-अपनी मांग है, सपा लेकर शिवसेना (यूबीटी) और डीएमके तक मांग रख चुके हैं. 

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की. करीब 50 मिनट तक चली इस बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं. माना जा रहा है कि किरण रिजिजू ने परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का सहयोग मांगा, लेकिन राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया. राहुल गांधी अपनी पार्टी में बातचीत करने के बाद अपनी राय देंगे. अब देखना है कि सरकार क्या रास्ता अपनाती है.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement