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राज्यसभा में आज पेश होगा एंटी पेपर लीक बिल, जानिए किसके पास क्या नंबरगेम

पेपर लीक के खात्मा के लिए मोदी सरकार नया विधेयक लेकर आई है. लोकसभा में हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक पास हो गया और अब बारी राज्यसभा की है. मोदी सरकार क्या लोकसभा की तरह ही राज्यसभा से भी बिल पास करा लेगी, उच्च सदन में का नंबर गेम क्या है?

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एंटी पेपर लीक बिल पर सत्तापक्ष और विपक्ष (Photo-PTI)
एंटी पेपर लीक बिल पर सत्तापक्ष और विपक्ष (Photo-PTI)

पेपर लीक को रोकने वाला 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' बुधवार को लोकसभा में हंगामे के बीच पास हो गया है.नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े तेवरों के बाद एंट्री पेपर लीक बिल ध्वनि मत से पारित हो गया. लोकसभा के बाद अब बारी राज्यसभा की है. 

मोदी सरकार एंटी पेपर लीक बिल को लोकसभा के बाद गुरुवार को दोपहर दो बजे राज्यसभा में पेश करेगी. राज्यसभा में बिल पर चर्चा होगी और उसके बाद सरकार पास कराने की कवायद करेगी. 

कॉकरोच जनता पार्टी के अगुवाई में जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन देशभर में फैल गया था. छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद मोदी सरकार पेपर लीक को रोकने के लिए सख्त कानून लेकर आई है.सवाल यही है कि लोकसभा की तरह क्या राज्यसभा में मोदी सरकार आसानी से बिल पास करा लेगी या सियासी अड़चन आएगी. ऐसे में राज्यसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष का नंबर गेम क्या है? 

लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल पास
पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन और भारी विरोध के बाद मोदी सरकार सख्त कानून बनाने का फैसला किया. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से निपटने के लिए लिए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' को लोकसभा में पेश किया.

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मंगलवार और बुधवार को एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा चली. सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच लोकसभा में जमकर बहस हुई, लेकिन विपक्ष ने बिल पर सवाल खड़े करने के बजाय दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सवाल उठाए. इसके अलावा पेपर लीक को लेकर मोदी सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा. 

लोकसभा में हंगामे के बीच बुधवार को  'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' यानी एंटी पेपर लीक बिल ध्वनि मत से यह बिल पास हो गया है. पारित इस विधेयक का मकसद सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहे. 

लोकसभा के बाद अब राज्यसभा की बारी
लोकसभा से 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' यानी एंटी पेपर लीक बिल ध्वनि मत से पारित होने के बाद मोदी सरकार गुरुवार को दोपहर में राज्यसभा में पेश करेगी. सरकार लोकसभा की तरह राज्यसभा में इस संसोधन विधेयक को आसानी से पास करा लेगी. इसकी वजह यह है कि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास राज्यसभा में बहुमत के ज्यादा नंबर है. 

विपक्षी दल राज्यसभा में संसोधन बिल पर चर्चा के दौरान जरूर सरकार को सियासी कठघरे में खड़ा करता नजर आ सकता है, लेकिन विधेयक के विरोध में बहुत  सवाल नहीं खड़े करते नजर नहीं आएंगे. लोकसभा में हमने देखा कि विपक्ष ने बिल चर्चा के दौरान नए विधेयक पर बोलने के ज्यादा दिल्ली में पुलिस के एक्शन पर फोकस रखा. ऐसे में मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया और विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. 

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राज्यसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष का नंबर गेम 
राज्यसभा की कुल संख्या 245 है, लेकिन तीन सीटें खाली है. इस लिहाज से अभी 242 सांसद हैं. ऐसे में सामान्य बिल को पास कराने के लिए 122 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास फिलहाल 152 राज्यसभा सांसदों का समर्थन है. इस लिहाज से सरकार के पास एंटी पेपर लीक बिल को पास कराने के लिए बहुमत से ज्यादा नंबर है, जिसके आधार पर आसानी से बिल को पास करा लेगी. 

कांग्रेस के अगुवाई वाले इंडिया ब्लाक के पास राज्यसभा में 63 सांसद है. इसके अलावा अन्यविपक्षी  दलों के पास 29 राज्यसभा सांसद है. ऐसे में पूरा विपक्ष एकजुट भी हो जाता है तो एंटी पेपर लीक बिल को मोदी सरकार आसानी से पास करा लेगी. हालांकि, संविधान संसोधन के लिए राज्यसभा में 162 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है, जिसके आंकड़े से मोदी सरकार फिलहाल दूर है. 

एंटी पेपर लीक बिल में सख्त प्रावधान
विधेयक में पेपर लीक रोकने के कई कड़े प्रावधान किए गए हैं. इस विधेयक में पेपर लीक के मामलों की जांच और सुनवाई तेज होगी और दोषियों को पहले से ज्यादा कड़ी सजा मिलेगी. मोदी सरकार ने इस नए विधेयक में सख्त नियम रखे हैं, जिसके तहत पेपर लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान रखा गया है. 

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केंद्र सरकार ने इस नए विधेयक में संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है और पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी. इस तरह पेपर लीक के मामलों को लंबा खिंचने से रोकने के लिए 'स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट' बनाए जाएंगे, जहां प्रतिदिन सुनवाई होगी. पेपर लीक की जांच राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी. 

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