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एंटी पेपर लीक बिल

एंटी पेपर लीक बिल

एंटी पेपर लीक बिल

देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations Amendment Bill) लोकसभा में पेश किया. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक सदन में रखा. इसका उद्देश्य पहले से लागू लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में बदलाव करना है ताकि परीक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्ती से कार्रवाई की जा सके.

इस एंटी पेपर लीक बिल के तहत पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. यदि कोई व्यक्ति ऐसे अपराध में दोषी पाया जाता है तो उसे 5 से 10 साल तक की जेल हो सकती है. इसके साथ ही उस पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

अगर किसी संगठित गिरोह या नेटवर्क के जरिए पेपर लीक किया जाता है, तो ऐसे मामलों में और अधिक सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. ऐसे अपराध में शामिल लोगों को 7 से 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

विधेयक में यह भी व्यवस्था की गई है कि दोषी पाए जाने वाले लोगों की संपत्ति कुर्क की जा सकेगी. वहीं, मामलों की जांच तेजी से पूरी करने के लिए दो महीने की समय सीमा तय करने का प्रस्ताव है. इसके बाद फास्ट-ट्रैक कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि फैसले में अनावश्यक देरी न हो.

इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित करने का भी प्रस्ताव है. यह टीम पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े मामलों की निगरानी और जांच करेगी.

सरकार का कहना है कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले लोगों और संगठित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करना है. वहीं, सामान्य परीक्षार्थियों को दंडात्मक प्रावधानों से अलग रखते हुए केवल वास्तविक दोषियों को कानून के दायरे में लाने की व्यवस्था की गई है. इससे भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है.

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