लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर CPM महासचिव एमए बेबी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आम तौर पर नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए दावा पेश करने का अधिकार है. हालांकि उन्होंने साफ किया कि विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर फैसला चुनाव के नतीजों के बाद ही होना चाहिए.
एमए बेबी से विपक्ष की जीत की स्थिति में प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर सवाल किया गया था. इस पर उन्होंने कहा, 'अगर विपक्ष जीतता है तो प्रधानमंत्री कौन होगा, इस पर चुनाव के बाद चर्चा होनी चाहिए. स्वाभाविक रूप से आम तौर पर नेता प्रतिपक्ष को दावा पेश करने का अधिकार होता है.'
हालांकि CPM महासचिव ने राहुल गांधी को सीधे तौर पर विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने या उनकी उम्मीदवारी का औपचारिक समर्थन करने से परहेज किया. उन्होंने कहा कि अभी इस मुद्दे पर काल्पनिक परिस्थितियां तैयार करके चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है.
ज्योति बसु का भी किया जिक्र
एमए बेबी ने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज वामपंथी नेता ज्योति बसु का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि अतीत में ऐसी परिस्थितियां बन चुकी हैं, जब CPM की केंद्रीय समिति ने इस बात पर चर्चा की थी कि पार्टी के किसी सदस्य को प्रधानमंत्री बनना चाहिए या नहीं. उस समय नाम ज्योति बसु का था. उन्होंने मौजूदा समय में CPM की संसदीय ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए अपना दावा पेश नहीं करेगी. बेबी ने कहा कि मौजूदा संख्या बल को देखते हुए CPM की ओर से ऐसा दावा करना 'हास्यास्पद' होगा.
उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को वैसा बहुमत मिलता है, जैसा वह चाहता है, तो विपक्ष के नेता इतने परिपक्व हैं कि आपस में चर्चा करके प्रधानमंत्री के नाम पर फैसला कर सकें. इसलिए अभी से इस मुद्दे पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी.
विजय के नाम की चर्चा पर क्या बोले?
एमए बेबी ने तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय के नाम की प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार के तौर पर चर्चा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि तमिलनाडु में बीजेपी की हार के बाद संभावित भावी प्रधानमंत्री के रूप में जोसेफ विजय के नाम की भी चर्चा हुई है. लेकिन यह अलग बहस है और मैं अभी उस बहस में नहीं पड़ना चाहता.'
इस तरह एमए बेबी ने राहुल गांधी की संभावित दावेदारी को खारिज नहीं किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि CPM फिलहाल किसी चेहरे को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के पक्ष में नहीं है. उनका कहना है कि विपक्ष को बहुमत मिलने की स्थिति में प्रधानमंत्री के नाम पर फैसला चुनाव के बाद सहयोगी दलों के नेताओं की आपसी चर्चा से होना चाहिए.