पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और हटाए जाने को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सामने ताजा आंकड़े रखे हैं. SIR के दौरान जिन लोगों के नाम हटाए गए या जिनके नाम जोड़ने को लेकर आपत्ति थी, उनसे जुड़ी 38.31 लाख अपीलें दाखिल की गई हैं. इनमें से अभी तक सिर्फ 1,26,194 मामलों का निपटारा हुआ है.
इन मामलों में 1,13,943 लोगों के नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ने का आदेश दिया गया है. यानी जिन मामलों में फैसला सुनाया गया, उनमें से करीब 93 फीसदी नामों को बहाल किया गया.
अभी भी लाखों लोग इंतजार में
सबसे बड़ा आंकड़ा उन मामलों का है, जिन पर फैसला होना बाकी है.चुनाव आयोग के मुताबिक 37,05,235 अपीलें अभी पेंडिंग हैं. मौजूदा रफ्तार से इन मामलों को निपटाने में 12 साल से ज्यादा लग सकते हैं. इसी वजह से आयोग ने ज्यादा ट्रिब्यूनल बनाने की जरूरत बताई है.
इससे पहले 18 सितंबर तक आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 38,20,683 अपीलों में से 37,18,452 मामले लंबित थे और सिर्फ 1,02,231 मामलों का निपटारा हुआ था.इसके बाद के ताजा आंकड़ों में निपटाए गए मामलों की संख्या बढ़कर 1,26,194 हो गई.
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SIR में क्यों कटे इतने नाम?
बंगाल में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम की जांच हुई थी. इस प्रक्रिया में करीब 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए. इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील की.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य में अपीलों की सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए. करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को भी दावों और आपत्तियों से जुड़े मामलों के निपटारे में लगाया गया. SIR के बाद बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान रिकॉर्ड मतदान भी देखने को मिला. दो चरणों में हुए चुनाव में कुल मतदान करीब 92.83% रहा, जो राज्य में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान था.