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अस्पतालों में क्या फैसिलिटीज और चार्जेस हैं... सब साफ-साफ करना होगा डिस्प्ले, नए नियम

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अस्पतालों में सर्विस चार्ज और उपलब्ध सुविधाओं के रेट इंग्लिश और लोकल लैंग्वेज में डिस्प्ले कराने का निर्देश दिया है. मंत्रालय ने कहा कि हेल्थकेयर चार्ज के बारे में साफ जानकारी से मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के खर्च का अंदाजा लगाने, सही फैसले लेने और मेडिकल खर्चों की योजना बनाने में मदद मिलेगी.

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मंत्रालय ने कहा कि हेल्थकेयर चार्ज के बारे में साफ जानकारी से मरीजों को मदद मिलती है. (Photo: Pexels)
मंत्रालय ने कहा कि हेल्थकेयर चार्ज के बारे में साफ जानकारी से मरीजों को मदद मिलती है. (Photo: Pexels)

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अस्पतालों और क्लिनिकों में इलाज और सुविधाओं के रेट्स साफ-साफ डिस्प्ले कराना सुनिश्चित करें.

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे एक पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने मौजूदा नियमों के पालन का रिव्यू करने और ऐसे कदम उठाने को कहा है जिनसे मरीज इलाज के खर्च के बारे में आसानी से जानकारी पा सकें.

रेट अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में दिखाए जाने चाहिए

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और इससे जुड़े 2012 के नियमों के तहत, जिन इलाकों में यह कानून लागू होता है, वहां संस्थानों को सर्विस चार्ज और उपलब्ध सुविधाओं को साफ तौर पर दिखाना होगा. यह जानकारी अंग्रेजी और स्थानीय भाषा, दोनों में दी जानी चाहिए.

जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय कानून लागू नहीं होता, वहां क्लिनिकल संस्थानों को उनके अपने नियमों के तहत रेगुलेट किया जाता है. इनमें से कुछ में रेट्स दिखाने की जरूरत होती है.

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ट्रांसपेरेंसी और मरीजों के अधिकारों पर जोर

मंत्रालय ने कहा कि हेल्थकेयर चार्ज के बारे में साफ जानकारी से मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के खर्च का अंदाजा लगाने, सही फैसले लेने और मेडिकल खर्चों की योजना बनाने में मदद मिलेगी. इससे बिलिंग को लेकर होने वाली उलझन और विवाद भी कम हो सकते हैं.

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी कहा गया है कि वे मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए पैकेज रेट्स दिखाने को बढ़ावा दें, जहां भी यह लागू हो. इस पहल का मकसद हेल्थकेयर की कीमतों में ज्यादा ट्रांसपेरेंसी लाना और हेल्थकेयर सिस्टम में जवाबदेही को मजबूत करना है.

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