शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अगर BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लोगों से वोट देने और विरोध करने का अधिकार छीन रही है, तो ऐसी सरकार को बदलने की जरूरत है. ठाकरे ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की रिजीम चेंज की मांग का भी समर्थन किया.
उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और दूसरे दलों की ओर से बुलाए गए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस युवाओं और महिलाओं पर हमला कर रही है. उनके कपड़े फाड़ रही है. ठाकरे ने कहा कि ऐसी सरकार को सत्ता से हटाना चाहिए.
'दिल्ली में पुलिस डांडिया खेलने गई है?'
अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए ठाकरे ने दिल्ली में तैनात पुलिस बल पर भी तंज कसा. उन्होंने सवाल किया कि क्या हजारों पुलिसकर्मियों को दिल्ली में डांडिया खेलने के लिए तैनात किया गया है. दरअसल, उन्होंने यह टिप्पणी नवरात्रि के दौरान डांडिया खेलने और प्रदर्शनकारियों पर लाठी-डंडों के इस्तेमाल के संदर्भ में थी.
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ठाकरे ने दशहरा समारोह के दौरान कॉकरोच का पुतला जलाए जाने की मीडिया रिपोर्टों का भी जिक्र किया. बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग राम को लाने का दावा करते हैं, वे कॉकरोच से डरते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि हम यहां सत्ता परिवर्तन करने के लिए हैं.
प्रशांत भूषण ने भी उठाई थी सत्ता परिवर्तन की बात
इससे पहले गुरुवार को प्रशांत भूषण ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस दौरान उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में किसी सरकार के खिलाफ असंतोष फैलाना अपराध नहीं है. भूषण ने कहा था कि मौजूदा संघर्ष अब वास्तव में रिजीम चेंज के लिए है. उनके इस बयान पर बीजेपी समेत सत्तारूढ़ दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी.
भूषण ने यह भी कहा था कि सरकार विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगा रही है, जबकि विपक्ष फिलहाल यह सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहा है कि चुनाव सही तरीके से हों. उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह की सख्ती और हिंसा जारी रही, तो रिजीम चेंज जरूर होगा.
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विरोध के अधिकार पर तेज हुई बहस
उद्धव ठाकरे के बयान से दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और विरोध करने के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. ठाकरे ने अपने बयान में वोट देने और विरोध करने के अधिकार को लोकतंत्र का अहम हिस्सा बताया. वहीं, प्रशांत भूषण ने भी सरकार के खिलाफ असंतोष जाहिर करने के अधिकार का बचाव किया है.
ठाकरे ने कहा कि अगर सरकार लोगों की आवाज दबाने की कोशिश करती है, तो उसके खिलाफ राजनीतिक बदलाव की मांग उठेगी. उनका बयान विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार और दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका पर उठाए जा रहे सवालों के बीच आया है.