पश्चिम बंगाल में तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने मार्क जुकरबर्ग को लेकर मेटा विवाद को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा कि जुकरबर्ग किसी दबाव में आकर किसी से माफी न मांगें. मोइत्रा ने कहा कि भारत सरकार आम नागरिकों को धमकाती और ब्लैकमेल करती रहती है, और अपनी आलोचना वाला कंटेंट मनमाने ढंग से हटवा देती है. उन्होंने आगे कहा कि गलती से कुछ घंटों के लिए एक वीडियो हट जाने से आसमान नहीं टूट पड़ा.
मोइत्रा का यह बयान उस विवाद के बीच आया है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को लेकर खड़ा हुआ है. दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में एक फेसबुक पोस्ट में देश के युवाओं से बात की थी और पेपर लीक जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था.
यह पोस्ट कुछ समय के लिए फेसबुक से हटा दी गई थी. मेटा ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए माफी मांगी और बाद में पोस्ट को दोबारा बहाल कर दिया. लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस सफाई को नाकाफी माना और मेटा के बड़े अधिकारियों को तलब किया गया.
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इसी मामले पर सोमवार को निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की बैठक हुई, जिसमें सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन पर चर्चा हुई. बैठक में मौजूद सांसदों ने मेटा से पूछा कि जब प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री आसानी से मौजूद रहती है, तो प्रधानमंत्री का वीडियो किसने हटाया.
एक सदस्य ने कहा कि लोकतंत्र में अगर प्रधानमंत्री का वीडियो सुरक्षित नहीं है, तो जिम्मेदारी तय होनी जरूरी है. सदस्यों ने डीपफेक रोकने वाले एल्गोरिदम की क्षमता पर भी सवाल उठाए.
मेटा अधिकारियों ने समिति के सामने खेद जताया और माफी मांगने की बात कही. लेकिन एक भाजपा सांसद ने कहा कि यह सिर्फ माफी मांगने का मामला नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करके कानूनी कदम भी उठाए जाने चाहिए. बैठक में गृह सचिव गोविंद मोहन, मेइटी सचिव एस कृष्णन के साथ स्नैपचैट, गूगल, एक्स, मेटा और यूट्यूब के प्रतिनिधि भी शामिल हुए.