झारखंड में JPSC और JSSC CGL की परीक्षाओं से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट से हजारों सफल अभ्यर्थियों को फिर से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने हेमंत सरकार के परीक्षा रद्द करने के नोटिफिकेशन पर लगाई गई रोक (स्टे) को बरकरार रखा है.
हाईकोर्ट के इस फैसले से उन हजारों युवाओं को बड़ी राहत मिली है, जो 18 अगस्त को सरकार के एक फैसले के बाद अचानक अपनी नौकरियों पर संकट देख रहे थे.
रिटायर्ड जस्टिस करेंगे सीआईडी जांच का सुपरविजन
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में JPSC 11वीं से 13वीं, JSSC CGL, CDPO और FSO परीक्षा रद्द करने के सरकारी आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अहम सुनवाई हुई.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से काउंटर एफिडेविट (जवाब) दाखिल किया गया. हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआईडी (CID) जांच पर भरोसा तो जताया है, लेकिन जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक बड़ा निर्देश दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि सीआईडी जांच का सुपरविजन रिटायर्ड जस्टिस गौतम चौधरी करेंगे.
निर्दोष छात्रों को परेशान करने पर कोर्ट का कड़ा रुख
अदालत के समक्ष यह बात भी सामने आई कि सीआईडी जांच के नाम पर कई निर्दोष छात्रों को बार-बार समन भेजकर बुलाया जा रहा है और उन्हें परेशान किया जा रहा है. कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि जांच की आड़ में किसी भी निर्दोष अभ्यर्थी को मानसिक या प्रशासनिक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए.
क्या था पूरा मामला?
18 अगस्त का नोटिफिकेशन: हेमंत सरकार ने कथित धांधली और अनियमितताओं का हवाला देते हुए JPSC और JSSC CGL समेत कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला सुनाया था.
20 अगस्त को मिला स्टे: सरकार के इस फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे. 20 अगस्त को हुई सुनवाई में कोर्ट ने सरकार के इस आदेश पर तुरंत अंतरिम रोक (Stay) लगा दी थी. अब अदालत ने स्टे बरकरार रखते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख 7 अक्टूबर तय की है.
हाईकोर्ट के इस रुख से साफ है कि जब तक सीआईडी जांच की पूरी रिपोर्ट और सुपरविजन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक रद्द की गई भर्तियों पर स्टे जारी रहेगा. राज्य के लाखों अभ्यर्थियों की नजरें अब 7 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं.