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सबसे बड़ी पेनाल्टी, मेटा पर लगा 120 लाख करोड़ का जुर्माना, बच्चों को एडिक्ट बनाने का है आरोप

अमेरिकी कंपनी मेटा पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया गया है. दिलचस्प ये है कि कंपनी की वैल्यूएशन 1.5 ट्रिलियन डॉलर्स मानी जाती है. यानी कंपनी की वैल्यू के लगभग बराबर. लेकिन मामला क्या है? आइए जानते हैं.

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मार्क जकरबर्ग की कंपनी मेटा पर क्यों लगा जुर्माना?
मार्क जकरबर्ग की कंपनी मेटा पर क्यों लगा जुर्माना?

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा को 120 लाख करोड की पेनाल्टी देनी पड़ सकती है? दरअसल अमेरिका के चार राज्यों ने कंपनी के खिलाफ ऐसी पेनाल्टी की मांग की है, जो टेक इंडस्ट्री के इतिहास की सबसे बड़ी रकम मानी जा रही है.

यह रकम करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर है. भारतीय रुपये में इसकी कीमत लगभग 120 लाख करोड़ रुपये बैठती है. यह रकम मेटा की कुल मार्केट वैल्यू के भी करीब है. दिलचस्प ये है कि मेटा का मार्केट कैप ही 1.5 ट्रिलियन डॉलर का है और पेनाल्टी 1.4 ट्रिलियन डॉलर की लगी है.

मेटा पर बच्चों को एडिक्ट बनाने का इल्जाम

मामला इस बात का नहीं है कि किसी यूजर का अकाउंट हैक हो गया या डेटा लीक हो गया. आरोप इससे कहीं बड़ा है. अमेरिकी राज्यों का कहना है कि Meta ने Facebook और Instagram को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे और टीनेजर्स इन ऐप्स के आदी हो जाएं. साथ ही कंपनी ने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि उसके प्लेटफॉर्म सेफ हैं, जबकि अंदरूनी तौर पर उसे इन खतरों की जानकारी थी.

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अमेरिका के कई राज्यों ने किया मेटा के खिलाफ मुकदमा

यह मामला अब अगस्त में कैलिफोर्निया की एक फेडरल कोर्ट में सुना जाएगा. फिलहाल कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी इस केस में शामिल हैं. इसके अलावा 14 दूसरे राज्यों ने भी मेटा के खिलाफ अलग कानूनी कार्रवाई शुरू की है. 

wयह भी पढ़ें: WhatsApp यूजरनेम फीचर पर मचा बवाल, सकार ने बढ़ाई मोहलत, अब मेटा के पास 9 जुलाई तक का टाइम

राज्यों का कहना है कि इंस्टाग्राम और फेसबुक के कई फीचर बच्चों को ज्यादा समय तक स्क्रीन पर रोकने के लिए बनाए गए. इनमें लगातार स्क्रॉल होने वाली फीड, नोटिफिकेशन, लाइक सिस्टम, रिकमेंडेशन एल्गोरिदम और दूसरे एंगेजमेंट फीचर शामिल हैं.

बच्चों को डिप्रेशन और नींद की समस्या हो रही है: आरोप

मेटा पर आरोप है कि इनकी वजह से कई बच्चों में चिंता, डिप्रेशन, नींद की समस्या और सोशल मीडिया की लत जैसी परेशानियां बढ़ीं हैं. 

मेटा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि सोशल मीडिया एडिक्शन कोई आधिकारिक मानसिक बीमारी नहीं है. इसलिए यह कहना गलत है कि कंपनी ने लोगों को जानबूझकर इसकी लत लगाई.

भारत सरकार ने भी भेजा है मेटा को नोटिस 

एक अलग मामले में भारत सरकार ने मेटा को इंस्टाग्राम पर चल रहे कथित चाइल्ड सेक्शुअल कंटेंट पर नोटिस भेजा है. बीबीसी की एक इन्वेस्टिगेशन में पाया गया कि मेटा के इंस्टाग्राम ऐप पर चाइल्ड सेक्शुअल कंटेंट चलाए और बेचे जा रहे हैं. इतना ही नहीं, इंस्टाग्राम एडल्ट और इलीगल कंटेंट का भी आरोप लगता आया है. नोटिस के बाद अभी तक कंपनी की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया है. 

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मेटा ने किया खारिज

मेटा का यह भी कहना है कि उसने युवाओं की सेफ्टी के लिए कई फीचर ऐड किए हैं और राज्यों की ओर से मांगी गई 1.4 ट्रिलियन डॉलर की पेनाल्टी का कोई मजबूत आधार नहीं है. 

यह भी पढ़ें: सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, इंस्टाग्राम पर एक्शन, 7 दिनों में देना होगा जवाब

गौरतलब है कि यह पहली दफा नहीं है जब मेटा ऐसे आरोपों का सामना कर रही है. इससे पहले भी अमेरिका में हजारों परिवार, स्कूल और कई राज्य मेटा, टिकटॉक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी कंपनियों के खिलाफ कोर्ट पहुंच चुके हैं.

उनका आरोप है कि सोशल मीडिया कंपनियों ने यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय तक रोकने के लिए ऐसे फीचर बनाए, जिनका असर बच्चों की मानसिक सेहत पर पड़ा. 

पहले भी लगे हैं आरोप और पेनाल्टी

कुछ महीने पहले न्यू मैक्सिको में भी मेटा के खिलाफ एक बड़ा फैसला आया था, जहां जूरी ने कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर की पेनाल्टी लगाई थी. वहीं एक दूसरे मामले में मेटा और यूट्यूब को एक युवा यूजर को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार माना गया था. इन मामलों ने अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ते कानूनी दबाव को और तेज कर दिया है. 

अगर अगस्त में होने वाले इस ट्रायल में अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है, तो यह केवल मेटा के लिए ही नहीं बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. इसके बाद दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई तेज हो सकती है. साथ ही कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं. 

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