पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा गत 20 जुलाई को बुलाए गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन (प्रोजेक्टाइल एक्शन गन) के इस्तेमाल पर रोक लगाने और घायल लोगों को मुआवजा देने की मांग की गई है.
यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने दाखिल की है. प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी का दावा है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान आरएएफ द्वारा चलाई गई पैलेट गन से वे घायल हुए थे.
शरीर में धंसे पैलेट सर्जरी से निकले
याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स ने अचानक पंप-एक्शन गन से फायरिंग की, जिससे धातु के छोटे-छोटे पैलेट बड़ी संख्या में भीड़ की ओर फैल गए. ये पैलेट याचिकाकर्ताओं के शरीर में धंस गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं, तेज दर्द हुआ और खून बहने लगा. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्हें इलाज के लिए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां शरीर में धंसे पैलेट निकालने के लिए सर्जरी करनी पड़ी. प्रशांत कुमार सिंह ने दावा किया कि अस्पताल में उन्होंने कम से कम एक और ऐसे व्यक्ति को देखा, जिसे पैलेट लगने से चोट आई थी.
सभी पीड़ितों को मुआवजा की मांग
याचिका में 20 जुलाई की घटना में घायल सभी लोगों को मुआवजा, पूर्ण चिकित्सा सुविधा, इलाज और पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धातु के पैलेट जैसे प्रोजेक्टाइल (Kinetic Projectiles) का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य को गंभीर, दीर्घकालिक और अपंग बनाने वाली चोट पहुंचा सकता है. इसलिए यह जनहित याचिका युवाओं और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के संवैधानिक और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए दाखिल की गई है.
याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी भीड़ को तितर-बितर करने से पहले उसे चेतावनी देना और शांतिपूर्ण तरीके से हटने का आदेश देना आवश्यक है. यदि भीड़ नहीं हटती, तब भी पहले सिविल फोर्स (Civil Force) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पैलेट गन से निकलने वाले धातु के कण अनियमित दिशा में फैलते हैं, इसलिए यह एक खतरनाक और मनमाना हथियार है, जिसे नागरिकों की भीड़ के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि इसका संचालन ऐसा है कि इसे 'न्यूनतम आवश्यक बल' (Least Necessary Force) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.