पैलेट गन (Pellet Gun) एक ऐसी बंदूक होती है, जो बारूद की बजाय संपीड़ित हवा (Compressed Air), गैस या स्प्रिंग की मदद से छोटे धातु या प्लास्टिक के छर्रे (Pellets) दागती है. इसे आमतौर पर एयर गन की एक श्रेणी माना जाता है. पैलेट गन का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जिनमें खेल, निशानेबाजी का अभ्यास, पशु नियंत्रण और कुछ देशों में भीड़ नियंत्रण जैसे कार्य शामिल हैं.
पैलेट गन से दागे जाने वाले छर्रे आकार में छोटे होते हैं और प्रायः सीसा (Lead), स्टील या अन्य धातुओं से बनाए जाते हैं. इनका आकार और वजन अलग-अलग हो सकता है. सबसे सामान्य कैलिबर 4.5 मिमी (.177), 5.5 मिमी (.22) और 6.35 मिमी (.25) हैं. अलग-अलग उपयोग के अनुसार अलग कैलिबर की पैलेट गन और छर्रों का चयन किया जाता है.
पैलेट गन मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं. स्प्रिंग-पिस्टन पैलेट गन में स्प्रिंग की शक्ति से हवा का दबाव बनता है. पीसीपी (Pre-Charged Pneumatic) गन पहले से भरी हुई संपीड़ित हवा का उपयोग करती है. वहीं CO₂ पैलेट गन कार्बन डाइऑक्साइड गैस के छोटे सिलेंडर से संचालित होती है. प्रत्येक प्रकार की कार्यप्रणाली अलग होती है और उनका उपयोग भी जरूरत के अनुसार किया जाता है.
भारत में पैलेट गन चर्चा का विषय तब बनी, जब कुछ सुरक्षा बलों द्वारा भीड़ नियंत्रण के दौरान इसका उपयोग किया गया. इस संदर्भ में समय-समय पर इसके इस्तेमाल, प्रभाव और वैकल्पिक उपायों को लेकर सार्वजनिक बहस और कानूनी चर्चाएं भी होती रही हैं. विभिन्न देशों में पैलेट गन के उपयोग और इसके नियम अलग-अलग हैं.
पैलेट गन को सामान्य आग्नेयास्त्र (Firearm) से अलग माना जाता है, क्योंकि इसमें बारूद का उपयोग नहीं होता. हालांकि, यह भी गंभीर चोट पहुंचाने की क्षमता रखती है. इसी कारण इसके उपयोग, रखरखाव और संचालन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है. प्रशिक्षण या खेल के दौरान आंखों और चेहरे की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा उपकरण पहनने की सलाह दी जाती है.
पैलेट गन का निर्माण कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियां करती हैं. इनका उपयोग खेल प्रतियोगिताओं, शूटिंग प्रशिक्षण केंद्रों और कुछ विशेष परिस्थितियों में अधिक देखा जाता है. किसी भी देश या राज्य में इसके स्वामित्व, खरीद और उपयोग से जुड़े नियम स्थानीय कानूनों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.
नीट पेपर लीक विवाद के बाद दिल्ली और बिहार में छात्रों पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन व AK-47 फायरिंग के मामले ने तूल पकड़ लिया है.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 20 जुलाई को दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब मांगा है. उन्होंने पैलेट गन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है.
दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP के संसद चलो मार्च के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारी शेख इरशाद मंसूरी चार दिन बाद अस्पताल से घर लौट आए. उनके चेहरे और गर्दन से सर्जरी के जरिए पैलेट निकाले गए. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल करने से इनकार किया है, जबकि अन्य घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज अभी भी जारी है.
CJP आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने घायल छात्रों से मुलाकात की और केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि छात्रों को इंसाफ मिलना चाहिए.
20 जुलाई को दिल्ली में CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन पर पेलेट गन से फायरिंग की गई. आजतक डिजिटल से बात करने वाले एक प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि उसके मेडिकल दस्तावेजों में पेलेट इंजरी दर्ज है. वहीं दिल्ली पुलिस और पीआईबी ने पेलेट गन इस्तेमाल करने के दावों को पूरी तरह गलत बताया है.
पैलेट गन से एक कारतूस में 600 छर्रे 1000 फीट प्रति सेकंड की स्पीड से निकलते हैं. दिल्ली प्रदर्शन में कई युवा गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इस गन का इस्तेमाल कश्मीर से लेकर कई जगहों पर हुआ है.
20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों पर RAF ने वेरिफिकेशन शुरू किया है. हालांकि, अभी तक औपचारिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश नहीं दिए गए हैं.
दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन से फायरिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मामले की जांच शुरू हो गई है और RAF जवान पर आरोप हैं। CRPF ने अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया है.
विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया है. इस गतिरोध के बीच शनिवार को इस्तीफा देने के बाद पहली बार संसद पहुंचे पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जब संसद भवन से बाहर निकल तो उनसे कई सवाल किए गए, लेकिन उन्होंने चुप्पी साध ली.