
NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई है. यह याचिका एक रिटायर्ड एयर फोर्स ऑफिसर की तरफ से दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीजेपी के आयोजक बयानों के जरिए आग को हवा दे रहे हैं. 20 जुलाई के संसद चलो मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
याचिका में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्य सरकारें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उन्हें वापस लेने को लेकर अलग-अलग फैसले ले रही हैं. इसी वजह से याचिकाकर्ता ने देशभर में एफआईआर पर एक समान नीति बनाने की मांग की है.
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से यह भी कहा कि युवाओं की तरफ से सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाली पोस्ट डाली जा रही हैं, जिन्हें रोका जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि इस पीआईएल पर अगले कुछ दिनों में सुनवाई की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL में तीन मांगें
रिटायर्ड एयर फोर्स ऑफिसर की इस पीआईएल में तीन मुख्य बातें रखी गई हैं. पहली, 20 जुलाई के संसद चलो मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय हो. दूसरी, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उनकी वापसी को लेकर एक समान नीति बने. तीसरी, सोशल मीडिया पर फैल रही आपत्तिजनक पोस्ट पर रोक लगे. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा.
सुप्रीम कोर्ट में क्यों दायर की गई PIL?
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह पीआईएल 20 जुलाई के संसद चलो मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय करने के लिए दायर की गई है. वकील ने कोर्ट से कहा कि सरकार काफी उदार रही है, इसके बावजूद आयोजक अब भी आग को हवा दे रहे हैं. याचिका की बड़ी बात यह भी है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर राज्यों का रुख एक जैसा नहीं है, जिससे एक समान नीति की जरूरत सामने आई है.
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यह मामला जंतर मंतर पर हुए सीजेपी के संसद चलो मार्च से जुड़ा है. यह प्रदर्शन प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों, खास तौर पर नीट-यूजी, के विरोध में आयोजित किया गया था. यह प्रदर्शन बाद में हिंसक झड़प में बदल गया था. इसमें 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 65 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे.

छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुआ था पैलेट गन का इस्तेमाल
मामले के बाद राजनीतिक और कानूनी स्तर पर कई विवाद शुरू हुए. भीड़ नियंत्रण के दौरान आरएएफ के पैलेट गन इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अलग से जांच भी चल रही है. इनपुट के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद महीने भर चलने वाला यह प्रदर्शन औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया था. इसके बावजूद प्रशासनिक जवाबदेही, एफआईआर और सोशल मीडिया से जुड़ा विवाद अब भी बना हुआ है.
एक अलग याचिका पर सुनवाई में क्या बोले CJI?
NEET परीक्षा लीक को लेकर जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने केंद्र सरकार से हलफनामे पर जवाब मांगा. केंद्र ने हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. अब मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी. इससे पहले पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया था कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए और उनकी गिरफ्तारी न की जाए.