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इस दिवाली दिल्ली में दोगुना जश्न, सुप्रीम कोर्ट ने जिन ग्रीन पटाखों की मंजूरी दी हैं वो कितना सुरक्षित?

सुप्रीम कोर्ट ने तय मानकों को पूरा करने वाले नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंटेड ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति दी है. जानिए ये पटाखे पुराने लड़ी वाले पटाखों से कैसे अलग हैं, इनमें प्रदूषण कितना कम होता है और इन्हें कैसे तैयार किया जाता है.

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SC ने नेक्स्ट जेन ग्रीन पटाखे को मंजूरी दी है. (Representational Image)
SC ने नेक्स्ट जेन ग्रीन पटाखे को मंजूरी दी है. (Representational Image)

दिल्ली में इस दिवाली पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तस्वीर बदलती नजर आ रही है. कोर्ट ने तय मानकों और फॉर्मूलेशन का पालन करने वाले खास ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंटेड ग्रीन पटाखों’ के निर्माण और बिक्री की अनुमति दी है. यानी अब पारंपरिक लड़ी की तरह जुड़े पटाखे भी कुछ शर्तों के साथ बनाए और बेचे जा सकेंगे. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह की लड़ी को मंजूरी मिल गई है.

नई पीढ़ी के इन ग्रीन पटाखों को तय फॉर्मूलेशन, उत्सर्जन, आवाज और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा. सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र ने बताया कि सीएसआईआर-नीरी की तरफ से तैयार मानकों के मुताबिक, बनाए गए जॉइंटेड पटाखों को सीमित और शर्तों के साथ अनुमति दी जा सकती है.

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लड़ी वाले पटाखों से कितने अलग हैं ये ग्रीन पटाखे?

लड़ी यानी कई अलग-अलग पटाखों को जोड़कर बनाई गई ऐसी श्रृंखला, जिसमें एक पटाखा फूटने के बाद दूसरा पटाखा तेजी से फूटता जाता है. पुराने जॉइंटेड पटाखों में एक सेकंड के अंदर 25 अलग-अलग ब्रेड फटते थे. नए वर्जन में इसे घटाकर पांच ब्रेड प्रति सेकंड किया गया है. यानी पटाखों के फटने की रफ्तार कम होगी और एक साथ बड़ी संख्या में पटाखों के फटने से होने वाला धुआं और शोर कम करने की कोशिश की गई है.

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कितने सुरक्षित हैं और कैसे होते हैं तैयार?

इन पटाखों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं कहा जा सकता. ग्रीन पटाखों का मकसद पारंपरिक पटाखों की तुलना में पार्टिकुलेट और गैसीय उत्सर्जन को कम करना है. सीएसआईआर-नीरी ने ऐसे पटाखों के लिए अलग-अलग फॉर्मूलेशन तैयार किए हैं, जिनमें रसायनों की मात्रा और संरचना में बदलाव किया जाता है. उत्सर्जन कम करने के लिए जिओलाइट और आयरन ऑक्साइड जैसे एडिटिव्स पर भी रिसर्च की गई है.

सीपीसीबी के मुताबिक, कम मात्रा में बेरियम साल्ट या नाइट्रेट और दूसरे ऑक्सीडाइजर वाले नए फॉर्मूलेशन से पारंपरिक पटाखों की तुलना में पीएम10 और पीएम2.5 के उत्सर्जन में 45 से 60 फीसदी तक कमी देखी गई है. हालांकि, कम बेरियम वाले ग्रीन पटाखों के दिल्ली समेत भोपाल, कोलकाता और चेन्नई में एयर क्वालिटी पर असर की मॉडलिंग स्टडी अभी जारी है. इसकी रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक आने की उम्मीद है.

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दिल्ली में 24 घंटे पटाखे नहीं फोड़ सकेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यह मंजूरी पूरे दिन पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं है. कोर्ट ने कहा कि पूरी तरह बैन से लोगों की भावनाएं प्रभावित होंगी, लेकिन पूरे दिन पटाखे चलाने से बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों समेत सभी पर असर पड़ेगा. इसलिए पटाखे चलाने के लिए तय समय को लेकर अलग आदेश दिया जाएगा. बेरियम वाले पटाखों पर भी अंतिम तस्वीर सीएसआईआर-नीरी की रिपोर्ट के बाद साफ होगी.

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