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Beat Report: राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम की बेल पर तत्काल रोक से SC का इनकार, सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया. मेघालय सरकार की याचिका पर नोटिस जारी कर ट्रायल की प्रगति देखने की बात कही.

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सोनम रघुवंशी हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. (Photo: ITG)
सोनम रघुवंशी हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. (Photo: ITG)

राजा रघुवंशी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने फिलहाल सोनम की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन मेघालय सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर कई कानूनी आपत्तियां उठाईं, जबकि कोर्ट ने कहा कि पहले ट्रायल की प्रगति देखी जाएगी.

सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष सॉलिसिटर जनरल ने केतन अग्रवाल हत्याकांड का भी हवाला दिया कि उसकी हत्या इसलिए भी की गई क्योंकि वो विग लगाता था.
हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के पीछे अरेस्ट मेमो में की गई चूक भी थी.

दस्तावेजों के मुताबिक, मेघालय पुलिस ने सोनम को भारतीय न्याय संहिता की धारा 403 के तहत आरोपी बनाया, जबकि संहिता में कुल 358 धाराएं ही हैं. मेघालय हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के इस अहम तर्क को माना.

कोर्ट में क्या हुआ?

ट्रायल कर रहे जज ने इस तथ्य के आधार पर ही आदेश पारित किया था कि गिरफ्तारी के उचित आधारों की सूचना आरोपी को नहीं दी गई थी. सभी संबंधित दस्तावेजों में कानून की जो धाराएं दर्ज थीं, उनमें यह कहा गया है कि उसे अन्य बातों के अलावा, धारा 403(1) आईपीसी के तहत आरोपों के लिए गिरफ्तार किया गया था. जबकि वास्तव में मामला धारा 103(1) और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत दर्ज किया गया था. साफ तौर से यह एक टाइपिंग की गलती है. 

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यह कानून के एक गैर-मौजूद प्रावधान को संदर्भित करती है. ऐसे में, केवल इसी आधार पर आरोपी और प्रतिवादी को जमानत पर रिहा करना अनुचित है. आरोपी और प्रतिवादी को इस गलती से न तो गुमराह किया गया है और न ही उसे कोई नुकसान हुआ है.

एडवोकेट जनरल की ये भी दलील थी कि ट्रायल जज विवादित आदेश पारित करते वक्त उन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर विचार करने में विफल रहे हैं, जो किसी भी जमानत याचिका में कानूनी रूप से अनिवार्य विचारणीय तथ्य होते हैं. उन्होंने याचिका का फैसला सिर्फ एक प्रक्रियात्मक आधार पर किया है, जबकि अपराध की प्रकृति और गंभीरता (इस मामले में हत्या), अभियोजन पक्ष के मामले की मजबूती, आरोपी का कथित अपराध से पहले और बाद का आचरण और अभी तक जांचे जाने वाले गवाहों के साथ छेड़छाड़ की संभावना पर पूरी तरह से विचार नहीं किया है.

इस संबंध में, उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अमरमणि त्रिपाठी (2005) 8 एससीसी 21, पैरा 18, 24 और 26 का हवाला दिया गया है. इस मामले के तथ्यों के संदर्भ में प्रासंगिक है. इन्हीं तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. यानी कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत की राहत बरकरार रखी.

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यह भी पढ़ें: दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका: बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर लगी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि सोनम जमानत पर रिहा हो चुकी है, हम बेल पर रोक लगाने के इच्छुक नहीं. 

मेघालय सरकार की अर्जी पर नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले हम देखेंगे कि ट्रायल कैसे चल रहा है. मेघालय हनीमून हत्याकांड पर मेघालय सरकार की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष मेघालय सरकार ने राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम को जमानत देने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है.

मेघालय सरकार की पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कि ये शॉकिंग केस है. इसमें चार्जशीट के मुताबिक, वह हत्या में शामिल थी और उसके साथ दूसरे साथी भी थे. कोर्ट ने तीन बार उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मजबूत सबूत हैं, साथ ही यह भी कहा कि वह भाग सकती है.
मेहता ने कहा कि गवाहों को प्रभावित या धमका सकती है या सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती है.

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