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विपक्ष की रैली के जवाब में 800 जिलों तक पहुंचने की तैयारी, जानें क्या है BJP का प्लान

विपक्ष 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली और प्रतीकात्मक संसद के जरिए एसआईआर पर सरकार को घेरेगा. जवाब में बीजेपी करीब 800 जिलों में पदयात्रा, जनसभा और जनसंपर्क के जरिए अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाएगी.

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बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन. (Photo- PTI)
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन. (Photo- PTI)

राजनीतिक लड़ाई अब सिर्फ संसद या दिल्ली के रामलीला मैदान तक सीमित नहीं रह गई है. विपक्ष 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहा है, तो बीजेपी ने भी इसका जवाब देने के लिए देशव्यापी रणनीति बनाई है. बीजेपी अब SIR के मुद्दे पर विपक्ष को उसके ही अंदाज में जवाब देने की तैयारी में है. पार्टी करीब 800 जिलों में अभियान चलाकर लोगों के बीच अपना पक्ष रखेगी. इसके तहत सामाजिक संगठनों, गैर-राजनीतिक संस्थाओं और आम लोगों के बीच बैठकें और जनसभाएं की जाएंगी.

बीजेपी विपक्ष के SIR विरोधी अभियान का जवाब देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. इसी सिलसिले में पार्टी मुख्यालय में हुई एक बड़ी बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने अपनी रणनीति पर चर्चा की. पार्टी का मकसद विपक्ष के आरोपों का जवाब देना और SIR को लेकर अपना पक्ष देश के हर जिले तक पहुंचाना है.

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बीजेपी की योजना करीब 800 जिला मुख्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की है. इसके लिए सामाजिक संगठनों, गैर-राजनीतिक संस्थाओं और आम लोगों के साथ संवाद किया जाएगा. पार्टी ने बुद्धिजीवियों, समाज के प्रति जागरूक नागरिकों और स्थानीय प्रभाव रखने वाले लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए जानकारी से जुड़ी पुस्तिकाएं और दूसरे दस्तावेज भी तैयार किए हैं.

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बीजेपी का आकलन है कि विपक्ष दिल्ली में 10 से 20 हजार लोगों की भीड़ जुटा सकता है, लेकिन पार्टी सैकड़ों जिलों में एक साथ कार्यक्रम करके अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाना चाहती है. यानी विपक्ष की एक बड़ी रैली के जवाब में बीजेपी देशभर में सैकड़ों जगहों पर कार्यक्रम करेगी.

'लोकतंत्र बचाओ' के जवाब में 'अराजकता हटाओ' का नारा

बीजेपी ने अपना जवाबी अभियान शुरू भी कर दिया है. 28 अक्टूबर को पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने लाल किले के पास श्री जैन लाल मंदिर से चांदनी चौक के टाउन हॉल चौक तक 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च निकाला था. अब पार्टी 1 नवंबर से देशव्यापी पदयात्रा अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसमें केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी अलग-अलग जगहों पर उतारा जाएगा.

इस अभियान के जरिए बीजेपी विपक्ष के नारे का जवाब उसी की भाषा में देना चाहती है. विपक्ष SIR को लोकतंत्र और वोट देने के अधिकार की लड़ाई बता रहा है, जबकि बीजेपी विपक्ष पर राजनीतिक अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगा रही है. पार्टी का मकसद विपक्ष के आरोपों को चुनौती देने के साथ उसके राजनीतिक नैरेटिव का भी जवाब देना है.

एक महीने से SIR पर विपक्ष का आंदोलन

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बीजेपी की यह तैयारी ऐसे समय में हो रही है, जब पिछले एक महीने से SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष लगातार प्रदर्शन कर रहा है. INDIA गठबंधन ने संयुक्त विरोध प्रदर्शन, मार्च और जनसंपर्क अभियान के जरिए इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की कोशिश की है.

विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाताओं के अधिकारों को खतरा पहुंच रहा है. कांग्रेस भी इस मुद्दे को देशव्यापी अभियान बनाने में जुटी है. पार्टी जिला मुख्यालयों से लेकर गांवों तक अपनी आपत्तियां पहुंचाने की कोशिश कर रही है.

विपक्ष की तरफ से प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट भी इसी रणनीति का हिस्सा है. इसके जरिए सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. अब 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली को इस आंदोलन के सबसे बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

1 नवंबर को आमने-सामने होंगी दोनों पार्टियों की रणनीतियां

आने वाले दिनों में दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में हैं. विपक्ष 1 नवंबर को मॉक पार्लियामेंट और रामलीला मैदान में बड़ी रैली करेगा. इसके साथ ही SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा. विपक्ष का मकसद SIR को लोकतांत्रिक और चुनावी अधिकारों पर हमले के तौर पर पेश करके जनता के बीच दबाव बनाना है.

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वहीं, बीजेपी 1 नवंबर से देशव्यापी पदयात्राएं शुरू करेगी. करीब 800 जिलों में सामाजिक संगठनों के साथ संवाद और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी. बीजेपी का मकसद SIR पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देना, इस प्रक्रिया के समर्थन में अपनी बात रखना और यह दिखाना है कि जनता के बीच पहुंच बनाने का अधिकार सिर्फ विपक्ष के पास नहीं है.

बीजेपी की बड़ी बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?

बीजेपी की रणनीति तैयार करने के लिए हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन शामिल हुए. उनके अलावा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, शिवराज सिंह चौहान और पीयूष गोयल भी मौजूद रहे. बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान और सुनील बंसल ने भी हिस्सा लिया. चर्चा का मुख्य फोकस विपक्ष के आरोपों का जवाब देने, पार्टी के संदेश को एक जैसा रखने और SIR पर बीजेपी का पक्ष देश के हर जिले तक पहुंचाने पर रहा.

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