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'अयोध्या में मेरी सेवा पूरी... जिस पर भरोसा किया उसी ने धोखा दिया', अब बोले चंपत राय

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सेवा समाप्ति का ऐलान किया है. उन्होंने भरोसेमंद सहयोगियों से धोखा मिलने की बात कही और अब इस कलंक के साथ काम जारी नहीं रखना चाहते.

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राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय. (File photo:ITG)
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय. (File photo:ITG)

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का एक बड़ा बयान सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपने बेहद करीबी सहयोगियों से कहा है कि वो अब इस कलंक के साथ अपनी सेवा आगे जारी नहीं रखना चाहते हैं. बताया जा रहा है कि फिलहाल चंपत राय एकांतवास में रह रहे हैं.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चंपत राय इस पूरे दान गबन प्रकरण के सामने आने के बाद से काफी आहत महसूस कर रहे हैं. उन्होंने अपने कुछ बेहद खास सहयोगियों के साथ हुई एक गोपनीय बातचीत के दौरान अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की. चंपत राय ने भावुक होकर कहा कि जिन लोगों को उन्होंने सबसे ज्यादा विश्वसनीय माना और उन पर भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने उन्हें धोखा दिया है, जिससे वो खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया है.

'मेरी सेवा समाप्त हो चुकी है'

ट्रस्ट के महासचिव ने अपने करीबियों से दो-टूक शब्दों में कहा कि अयोध्या और राम मंदिर के लिए उनकी जो भी धार्मिक व प्रशासनिक सेवा थी, वह अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है. उन्होंने इस बात को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि वो अपने ऊपर लगे इस तरह के गंभीर आरोपों और सामाजिक कलंक के साथ काम को किसी भी कीमत पर आगे जारी नहीं रखेंगे. वो इस बदनामी के साथ अपने पद की जिम्मेदारी संभालने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं.

प्रबंधन में बदलाव की तैयारी तेज

इस पूरे कथित घोटाले के सामने आने के बाद चंपत राय ने खुद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी, जिस पर अब वो अडिग नजर आ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य महत्वपूर्ण सदस्य अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इन इस्तीफों पर आगामी 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की उच्च स्तरीय बैठक में गहन विचार-विमर्श किया जाएगा. दोनों नेताओं के भविष्य पर इस बैठक में दो-तिहाई बहुमत के आधार पर ही कोई अंतिम और बड़ा फैसला लिया जाएगा.

इस बैठक में ट्रस्ट के प्रबंधन से जुड़े अहम मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, खासकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पिछले महीने गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सिफारिशों के मद्देनजर.

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SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद 8 गिरफ्तार

आपको बता दें कि अयोध्य में चढ़ावा चोरी का ये विवाद 7 जून को तब शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर में दान में हेराफेरी का आरोप लगाया था. इसके बाद मामले के तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए एसआईटी की गठन कर दिया. SIT ने 23 जून को सौंपी अपनी शुरुआती रिपोर्ट, गड़बड़ी पुष्टि की थी, जिसके बाद 25 जून को FIR दर्ज की गई और मंदिर में दान की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा पुलिस ने चंपत राय समेत कई पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज किए हैं.

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