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अहमदाबाद प्लेन क्रैश: ड्रीमलाइनर के फ्यूल स्विच की जांच पूरी, बोइंग को नहीं मिली कोई गड़बड़ी

अहमदाबाद विमान हादसे के बाद चर्चा में आए ड्रीमलाइनर के फ्यूल कंट्रोल स्विच की जांच में बोइंग को कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं मिली है. सरकार ने बताया कि कुछ जांच पूरी हो चुकी हैं, जबकि अंतिम रिपोर्ट आने तक विस्तृत तकनीकी परीक्षण जारी रहेगा.

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ड्रीमलाइनर के फ्यूल स्विच में नहीं मिली गड़बड़ी (Photo: ITG)
ड्रीमलाइनर के फ्यूल स्विच में नहीं मिली गड़बड़ी (Photo: ITG)

अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे के बाद एअर इंडिया के ड्रीमलाइनर जहाजों को लेकर जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा था, उस पर अब आधिकारिक जवाब सामने आ गया है. बोइंग 787-8 के जिस फ्यूल कंट्रोल स्विच की फरवरी में एक पायलट की शिकायत के बाद जांच कराई गई थी, अहमदाबाद हादसे के बाद वही सिस्टम चर्चा के केंद्र में आ गया था. संसद के उच्च सदन में पेश की गई सरकारी जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के सिएटल में इस स्विच और इसके लॉकिंग मैकेनिज्म का जो परीक्षण हुआ, उसमें किसी भी तरह की तकनीकी खामी या असामान्यता दर्ज नहीं की गई है.

दरअसल, इस पूरी पड़ताल की शुरुआत इसी साल फरवरी में हुई थी, जब लंदन से बेंगलुरु पहुंची एअर इंडिया की फ्लाइट AI132 के पायलट ने लैंडिंग के बाद बोइंग 787-8 विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच में संभावित गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई. मामला उड्डयन सुरक्षा से जुड़ा था, लिहाज एअर इंडिया ने बिना देर किए उस विमान को फौरन ग्राउंडेड कर दिया. इसके बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर यानी बोइंग को सिएटल में इसका ओईएम-लेवल टेस्ट करने के निर्देश दिए. सरकार ने अब साफ कर दिया है कि एहतियात के तौर पर पूरे ड्रीमलाइनर बेड़े की दोबारा जांच की गई थी और कहीं कोई खराबी नहीं मिली.

लेकिन सवाल उठता है कि एक छोटे से स्विच को लेकर इतनी बेचैनी और इतनी बड़ी जांच की नौबत क्यों आई? इसकी जड़ें पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हुए उस खौफनाक हादसे से जुड़ी हैं, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरते ही एअर इंडिया का ड्रीमलाइनर महज कुछ ही सेकंड में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और 260 लोगों की जान चली गई थी. एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया था कि टेक-ऑफ के दौरान एक सेकंड के अंतर पर दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति बंद हो गई थी. इसके बाद फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर भी सवाल उठने लगे थे.

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कॉकपिट का वह उलझन भरा पल और हवा में थमी सांसें

अहमदाबाद हादसे के बाद सामने आई शुरुआती जांच की परतें किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देती हैं. हादसे की जांच कर रही एजेंसी ने जब कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर का ब्योरा खंगाला, तो उसमें एक पायलट दूसरे से यह पूछता सुनाई देता है कि उसने ईंधन की सप्लाई बंद क्यों की? जवाब में दूसरा पायलट कहता है कि उसने ऐसा नहीं किया. इस बातचीत से इतना जरूर साफ होता है कि टेक-ऑफ के उन शुरुआती सेकंड में कॉकपिट के भीतर स्थिति को लेकर भ्रम था. इसी ऑडियो के सामने आने के बाद फ्यूल कंट्रोल सिस्टम को लेकर कई सवाल उठे, जिनकी जांच अब भी जारी है.

संसद में जब इस हादसे की अंतिम रिपोर्ट में हो रही देरी पर सवाल पूछा गया, तो स्थिति साफ करते हुए मुरलीधर मोहोल ने कहा कि जांच में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है. बड़े हवाई हादसों की जांच किसी तय समय-सीमा में पूरी नहीं की जा सकती, क्योंकि इसमें विमान के मलबे, ब्लैक बॉक्स के डेटा, तकनीकी परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय समीक्षा जैसे कई अहम चरण शामिल होते हैं. सरकार का कहना है कि जांच पूरी गंभीरता से आगे बढ़ रही है और हादसे से जुड़े हर संभावित कारण की बारीकी से पड़ताल की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो.

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उड़ानों का भरोसा और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

बोइंग की तरफ से आई यह नई रिपोर्ट उड्डयन उद्योग और एअर इंडिया के लिए राहत की खबर जरूर है, लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है. एक तरफ कंपनी की जांच में फ्यूल कंट्रोल स्विच और उसके लॉकिंग मैकेनिज्म में कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं मिली है. दूसरी तरफ पूरे थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल की जांच अभी भी जारी है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष आने का इंतजार रहेगा.

आम मुसाफिरों के लिए उड़ानों पर भरोसा तभी पूरी तरह लौटेगा, जब दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी करेगा और 260 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे की असली वजह सामने आएगी. फिलहाल सरकार और विमानन नियामक का कहना है कि उड़ानों की सुरक्षा से जुड़ी जांच पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ रही है. सिएटल से आई इस रिपोर्ट ने कम से कम एक बड़े सवाल का जवाब जरूर दे दिया है, लेकिन अहमदाबाद के आसमान में उस दिन आखिर क्या हुआ था, इसका अंतिम जवाब अभी आना बाकी है.
 

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