लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे प्रभावित आदिवासियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत का वीडियो साझा कर अन्याय के खिलाफ पीड़ितों का साथ देने का भारोसा दिया. आदिवासियों ने बताया कि सिंचाई और बांध परियोजनाओं के कारण गलत नीतियों से 50 हजार लोग बेघर हो गए हैं. ग्रामीणों ने जमीन के बदले जमीन, उचित मुआवजे और पर्यावरण नुकसान को लेकर न्याय की गुहार लगाई है.
मुलाकात के दौरान आदिवासियों के प्रतिनिधि ने राहुल गांधी को बताया कि ये मुद्दा मुख्य रूप से पन्ना और छतरपुर जिलों से संबंधित है, जहां केन-बेतवा लिंक परियोजना एक प्रमुख परियोजना है. इसके अतिरिक्त, पन्ना जिले में मजगावां मध्यम सिंचाई परियोजना और रुंझ डैम तथा छतरपुर जिले में एनटीपीसी और नेगवां लघु सिंचाई परियोजना भी शामिल हैं. इन परियोजनाओं का प्रभाव काफी व्यापक है, जिससे लगभग 50,000 लोगों की आबादी है जो सरकार की गलत नियम, नीति और नीयत के कारण अपने घरों से बेघर हो गई. उन्होंने अपने घर, जल, जंगल, जमीन और आजीविका खो दी है.
उन्होंने दावा किया कि इस बारिश के मौसम में भी उनके पास रहने को घर नहीं है. पर वह अब कहीं-न-कहीं अनपा घर बना रहे हैं.
उन्होंने सरकार के प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि केन नदी को बेतवा में जोड़ने वाली इस परियोजना से 21 आदिवासी बहुल गांव प्रभावित हो रहे हैं.
उन्होंने गंभीर पर्यावरणीय चिंताओं को उजागर करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में 46 लाख पेड़ हैं, जिन्हें "बुंदेलखंड के फेफड़े" कहा जाता है. ये क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा है जो देश का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ टाइगर रिजर्व है, जहां 2009 में कोई बाघ नहीं था, लेकिन अब 100 से अधिक बाघ हैं.
2011 में रोक दिया गया था प्रोजेक्ट
केन नदी को पूरी बुंदेलखंड की जीवनदायिनी नदी बताते हुए व्यक्ति ने कहा कि इस परियोजना को कई अवैध तरीकों से आगे बढ़ाया जा रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि 2011 में कांग्रेस सरकार के दौरान जयराम रमेश ने इसके भयंकर पर्यावरणीय विनाश के कारण इस पर रोक लगा दी थी. हालांकि, वर्तमान मोदी सरकार ने इसे तेजी से आगे बढ़ाया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में अभी-भी इस पर मामले चल रहे हैं.
प्रोजेक्ट से प्रभावित हैं 7 हजार परिवार
राहुल गांधी द्वारा पूछे जाने पर आदिवासियों का प्रतिनिधित्व कर रहे व्यक्ति ने बताया कि कुल 11,500 एकड़ जमीन इस परियोजना में जा रही है, जिससे लगभग 7,000 परिवार प्रभावित होंगे. ये लोग मुख्य रूप से किसान और वन आजीविका पर आधारित हैं. साथ ही वहां बैठे आदिवासियों ने पुष्टि की की उनकी जमीनें पूरी तरह सरकार ने ले ली हैं.
महिलाओं ने सुनाई आपबीती
वहीं, राहुल गांधी से मिलने पहुंची आदिवासी महिलाओं ने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि बच्चों के लिए जमीन और मकान के लिए जगह दी जाए. उन्होंने बताया कि उनकी जमीन ले ली गई है, लेकिन उन्हें कोई वैकल्पिक जमीन नहीं दी गई है. 12.5 लाख रुपये का मुआवजा मिला है जो जमीन खरीदने और मकान बनाने के लिए अपर्याप्त है.
एक अन्य महिला ने ने पुलिस की बर्बरता का एक भयावह अनुभव साझा करते हुए कहा, पुलिस ने 50 महिलाओं को बच्चों के साथ 10 किलोमीटर तक दौड़ाया गया और उन्हें दूध पिलाने तक नहीं दिया गया. जबकि एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को रात 2 बजे पुलिस ने दौड़ाया था.
क्या है केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट
आपको बता दें कि केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के तहत करीब 44,000 करोड़ रुपये की लागत से दौधन बांध और 221 किमी लंबी नहर बनाई जानी है. इसका लक्ष्य बुंदेलखंड में 10.62 लाख हेक्टेयर सिंचाई, 62-65 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट बिजली देना है. हालांकि, 22 गांवों (10 पूरी तरह डूब क्षेत्र) के 7,000 परिवार विस्थापन, फर्जी लाभार्थियों और सहमति प्रक्रिया पर विरोध कर रहे हैं. ग्रामीणों की मांग प्रत्येक वयस्क को अलग लाभार्थी मानने, जमीन के बदले जमीन, गांव के बदले गांव और जबरन बेदखली रोकने की है.