अमेरिका में चुनावी नियमों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से झटका लगा है. वॉशिंगटन डीसी के संघीय जज अमीर अली ने राज्यों और स्थानीय सरकारों को मिलने वाली एंटी-टेरर फंडिंग को चुनावी बदलावों से जोड़ने वाली ट्रंप प्रशासन की शर्तों पर रोक लगा दी. 24 पेज के फैसले में जज ने कहा कि फेडरल एजेंसियों के पास कांग्रेस से ऐसी शर्तें लगाने का अधिकार नहीं था.
मामला करीब 1.1 अरब डॉलर के एंटी-टेरर ग्रांट प्रोग्राम से जुड़ा है. प्रशासन ने कहा था कि राज्यों और शहरी इलाकों के लिए मिलने वाली फंडिंग का 20 फीसदी हिस्सा तब तक रोका जा सकता है, जब तक वे तय चुनावी शर्तों को पूरा नहीं करते. इन शर्तों में वोटरों की नागरिकता की जांच, कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम की जगह हाथ से मार्क किए गए पेपर बैलेट और चुनाव नतीजों के ऑडिट जैसी बातें शामिल थीं.
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FEMA को चुनावी नियम तय करने का अधिकार नहीं
जज अमीर अली ने कहा कि कांग्रेस ने FEMA को आतंकवाद और साइबर हमलों से महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा के लिए फंड देने का अधिकार दिया है, लेकिन चुनाव प्रशासन के नियम तय करने का अधिकार नहीं दिया. कोर्ट के मुताबिक, चुनावी बदलावों की ये शर्तें उस ग्रांट के मूल उद्देश्य से जुड़ी नहीं थीं.
यह मुकदमा ओहायो के कोलंबस, टेनेसी के नैशविल और डेविडसन काउंटी और टेक्सास की कई काउंटी ने दायर किया था. उनका कहना था कि FEMA अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर चुनाव व्यवस्था में दखल दे रही है.
20 फीसदी फंड रोकने की थी शर्त
FEMA की योजना के तहत राज्यों को अपने वोटर रोल में नागरिकता की जांच करने, कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम से पेपर बैलेट की ओर जाने की योजना बनाने और चुनावी नतीजों के ऑडिट की व्यवस्था दिखाने को कहा गया था. इन शर्तों को पूरा नहीं करने पर 20 फीसदी फंड रोकने की बात कही गई थी.
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ट्रंप प्रशासन ने इन बदलावों को चुनावों की सुरक्षा और विदेशी दखल तथा साइबर हमलों से बचाव के लिए जरूरी बताया था. लेकिन कोर्ट ने कहा कि एंटी-टेरर ग्रांट के जरिए इस तरह के चुनावी बदलाव लागू नहीं कराए जा सकते.