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सिंगापुर में भारतीय IT वेंडर को जेल, 18,000 कोर्ट फाइलों को खतरे में डालने का आरोप

सिंगापुर में भारतीय नागरिक जनार्दनन तमिल कोवन को स्टेट कोर्ट की 18,016 फाइलों की सुरक्षा खतरे में डालने के मामले में 28 हफ्ते की जेल की सजा सुनाई गई है. उन्होंने कोर्ट के सरकारी लैपटॉप में बिना अनुमति बदलाव किया और एक दूसरे व्यक्ति को रिमोट एक्सेस दिया था.

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भारतीय आईटी वेंडर पर गंभीर आरोप लगे थे. (सांकेतिक तस्वीर)
भारतीय आईटी वेंडर पर गंभीर आरोप लगे थे. (सांकेतिक तस्वीर)

सिंगापुर में काम कर रहे 42 साल के भारतीय IT वेंडर जनार्दनन तमिल कोवन को कोर्ट की हजारों फाइलों की सुरक्षा खतरे में डालने के मामले में 28 हफ्ते की जेल की सजा सुनाई गई है. उन्होंने सोमवार को सरकारी गोपनीयता कानून के तहत अपना अपराध कबूल किया. उन पर सरकारी लैपटॉप में बिना अनुमति बदलाव करने का भी आरोप था. तीसरे आरोप को सजा सुनाते समय ध्यान में रखा गया.

जनार्दनन तमिल कोवन जून 2024 से लेनोवो PCCW सॉल्यूशंस में सर्विस डिलीवरी मैनेजर के तौर पर सिंगापुर स्टेट कोर्ट से जुड़े थे. वह कोर्ट की क्लाउड सिस्टम टीम के टीम लीडर थे. उन्हें सरकार की ओर से एक लेनोवो थिंकपैड लैपटॉप दिया गया था, जिसमें बिना अनुमति एक्सेस और बदलाव की मनाही थी.

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परीक्षा देने के लिए दिया रिमोट एक्सेस

4 अगस्त 2025 को जनार्दनन अपने लैपटॉप में खराबी आने के बाद इसी सरकारी लैपटॉप से IT गवर्नेंस से जुड़ी प्रोफेशनल परीक्षा देना चाहते थे. लेकिन सिक्योरिटी सिस्टम की वजह से वह लैपटॉप चला नहीं पाए. इसके बाद उन्होंने हरि बालन नाम के एक परिचित से संपर्क किया. दोनों पहले WhatsApp पर IT से जुड़े कोर्स को लेकर बात कर चुके थे.

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इसके बाद जनार्दनन ने अपने लैपटॉप का रिमोट एक्सेस उन्हें दे दिया. कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, बालन का IP एड्रेस भारत में था. उस वक्त लैपटॉप में स्टेट कोर्ट की 18,016 फाइलें मौजूद थीं. इनमें 18,015 फाइलें प्रतिबंधित लेकिन गैर-संवेदनशील श्रेणी में थीं, जबकि एक फाइल प्रतिबंधित और हाई-सेंसिटिव थी.

फाइलों में थे लॉगिन क्रेडेंशियल और सीक्रेट की

इन फाइलों में स्टेट कोर्ट के नेटवर्क से जुड़े लॉगिन क्रेडेंशियल, सीक्रेट की और नेटवर्क आर्किटेक्चर की जानकारी थी. हालांकि इनमें किसी खास केस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी नहीं थी, लेकिन इनका इस्तेमाल उन सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता था, जहां गोपनीय केस जानकारी और जजों के नोट्स मौजूद थे.

14 अगस्त 2025 को सिंगापुर न्यायपालिका के कॉरपोरेट सर्विसेज डिविजन के एक अधिकारी ने बिना अनुमति रिमोट डेस्कटॉप एप्लिकेशन इंस्टॉल किए जाने की पुलिस में शिकायत की. इसके बाद जनार्दनन की जांच शुरू हुई.

कोर्ट ने बताया बड़ा खतरा

सरकारी वकील ने 7 से 9 महीने की जेल की मांग की थी. उन्होंने कहा कि जनार्दनन स्टेट कोर्ट की क्लाउड सिस्टम टीम के लीडर थे और उन्हें पता होना चाहिए था कि लैपटॉप में अनधिकृत बदलाव और एक्सेस की इजाजत नहीं है. बचाव पक्ष ने 3 से 4 महीने की सजा की मांग की और बताया कि जनार्दनन के भारत में पत्नी और दो बच्चे हैं और परिवार आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा है.

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हालांकि, जिला जज लोरेन हो ने कहा कि इस मामले में नुकसान का खतरा काफी बड़ा था. उन्होंने कहा कि इससे ऐसा सिस्टमेटिक हमला हो सकता था, जिससे लोगों में डर और चिंता पैदा हो सकती थी. हालांकि रिमोट एक्सेस के दौरान कोई फाइल ट्रांसफर नहीं हुई, लेकिन कोर्ट ने 18,016 फाइलों की सुरक्षा को खतरे में डालने को गंभीर माना और जनार्दनन को 28 हफ्ते की जेल की सजा सुनाई.

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