गांव और शहर के बीच का फर्क सिर्फ सड़क और इमारतों से नहीं, सुविधाओं और अवसरों से भी मापा जाता है. इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा यात्रा’ में शामिल बाइकर्स से बातचीत की. उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल में भारत में शहरों और गांवों के बीच की दूरी काफी कम हुई है और गांवों के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव आया है.
PM मोदी ने यह बात वाराणसी से वडनगर जा रही बाइक यात्रा के प्रतिभागियों से संवाद के दौरान कही. यह यात्रा उनके जन्मस्थान वडनगर और लोकसभा क्षेत्र वाराणसी को जोड़ रही है. दोनों दिशाओं में निकली ये यात्राएं 7 अक्टूबर को समाप्त होनी हैं जो कि प्रधानमंत्री के 25 साल के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा हैं.
PM मोदी ने प्रतिभागियों से कहा कि समाज में लगातार सुधार और सकारात्मक बदलाव के लिए काम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि काम का मकसद सिर्फ वोट बैंक की राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि गांवों में आज इंफ्रास्ट्रक्चर पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुआ है. साथ ही, 2014 में उनकी सरकार आने के बाद से देश की महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ी है.
वडनगर से काशी तक ‘सेवा’ का संदेश
‘सेवा यात्रा’ 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन पर शुरू हुई थी. वडनगर और वाराणसी से दो बाइक यात्राएं एक साथ रवाना हुई थीं. इनका मकसद शहरों के साथ-साथ कस्बों और गांवों तक पहुंचना और लोगों से सीधे जुड़ना है.
इस दौरान यात्रा में शामिल टीमें करीब 35,500 किलोमीटर के सफर में गांवों, स्कूलों और सार्वजनिक जगहों पर सेवा गतिविधियों से जुड़ रही हैं. वडनगर PM मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी 2014 से उनका लोकसभा क्षेत्र है.
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प्रधानमंत्री ने कहा कि वडनगर ने उन्हें जीवन को दिशा देने वाले संस्कार दिए और काशी ने उन संस्कारों में सेवा के कई रंग जोड़े. यह बाइक यात्रा में सेवा, जनसंपर्क, युवाओं की भागीदारी, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक जुड़ाव जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है.
यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही गांवों में पहुंच रही टीमों और प्रधानमंत्री के संदेश के जरिए ‘सेवा’ और विकास की राजनीति को लेकर चर्चा भी तेज है.