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कपड़ों से इम्प्रेशन! ट्रेंडी-सस्ता नहीं ऐसे कपड़े खोज रहा Gen Z

क्या जेन Z के लिए फैशन का मतलब अब सिर्फ नए ट्रेंड्स और सस्ते कपड़े नहीं रह गया है? क्या युवा अब कपड़े खरीदते समय कीमत के साथ क्वालिटी, डिजाइन, ब्रांड और खरीदारी के अनुभव को भी ज्यादा महत्व दे रहे हैं? नए फैशन ब्रांड्स, मिड-प्रीमियम कपड़ों और बेहतर खरीदारी अनुभव की बढ़ती मांग क्या फैशन की बदलती पसंद की ओर इशारा कर रही है?

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क्या अब कपड़ों का सिर्फ ट्रेंडी होना जेन जी के लिए काफी नहीं?
क्या अब कपड़ों का सिर्फ ट्रेंडी होना जेन जी के लिए काफी नहीं?

आज की Gen Z और युवा कंज्यूमर्स के लिए फैशन सिर्फ नए ट्रेंड्स को फॉलो करने तक सीमित नहीं है. कपड़े खरीदते समय अब कीमत के साथ क्वालिटी, डिजाइन और ब्रांड भी मायने रखते हैं. यानी सिर्फ सस्ता और ट्रेंडी होना काफी नहीं, कपड़े में पैसे की सही वैल्यू मिलना भी जरूरी है.

डेलॉइट इंडिया की 28 जनवरी 2026 को जारी रिपोर्ट ‘वीविंग अ न्यू इंडिया आइडेंटिटी: द राइज ऑफ फास्ट फैशन एंड अफोर्डेबल प्रीमियम’ के मुताबिक भारत का फैशन मार्केट भी इसी बदलाव से गुजर रहा है. लोग अब ज्यादा कपड़े खरीदने के बजाय ऐसी चीजों पर खर्च करना चाहते हैं, जिनमें उन्हें बेहतर क्वालिटी और वैल्यू मिले.

नए फैशन ब्रांड्स को भी मिल रहा मौका

इस बदलाव का असर ब्रांड्स की पसंद पर भी दिख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40% लोगों ने पिछले एक साल में नए फैशन ब्रांड्स ट्राय किए हैं. सोशल मीडिया, दूसरों की सलाह और सही कीमत लोगों को नए ब्रांड्स आजमाने के लिए प्रेरित कर रही है. खासकर युवा और शहरी कंज्यूमर्स नए फैशन को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, लेकिन साथ ही ये भी देखते हैं कि उनके पैसे के बदले प्रोडक्ट कितना अच्छा है.

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3,500 से 7 हजार रुपए वाले कपड़ों की बढ़ रही मांग

इसका आसान मतलब है कि लोग अब सिर्फ सस्ते कपड़े खरीदने के बजाय थोड़े महंगे और बेहतर क्वालिटी वाले कपड़ों पर भी पैसे खर्च कर रहे हैं. 3,500 से 7 हजार रुपए तक के कपड़ों को मिड-प्रीमियम फैशन कहा जा रहा है और इस सेगमेंट के करीब 25% की सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है.

वहीं इससे महंगे प्रीमियम कपड़ों के बाजार में 45% से ज्यादा सालाना बढ़ोतरी का अनुमान है. यानी फैशन में लोग अब कीमत के साथ ब्रांड, क्वालिटी और स्टाइल को भी ज्यादा महत्व दे रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो लोग अब बहुत सस्ते कपड़ों के बजाय बेहतर क्वालिटी और डिजाइन के लिए थोड़ा ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महंगे कपड़ों पर लोग बिना सोचे पैसे खर्च कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक प्रीमियम खरीदारी अक्सर डिस्काउंट, त्योहार या किसी खास मौके के आसपास की जाती है. यानी महंगे फैशन की चाह है, लेकिन खरीदारी अभी भी सोच-समझकर हो रही है.

सिर्फ कपड़ा नहीं, शॉपिंग का अनुभव भी जरूरी

कपड़े खरीदते समय अब सिर्फ कपड़े और उसकी कीमत पर ध्यान नहीं दिया जाता. करीब 30% शॉपर्स के खरीदारी के फैसले पर स्टोर का माहौल और अनुभव भी असर डालता है.

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अच्छा एम्बियंस, सही सलाह और ब्रांड का बेहतर एक्सपीरियंस कस्टमर को खरीदारी के लिए प्रभावित कर सकता है. यानी अब फैशन में सिर्फ क्या खरीद रहे हैं, यह नहीं, बल्कि कहां और कैसे खरीद रहे हैं, यह भी मायने रखता है.

कुल मिलाकर, भारतीय फैशन मार्केट में बदलाव साफ है. कंज्यूमर्स सिर्फ ज्यादा खरीदने के बजाय बेहतर क्वालिटी, सही कीमत और अच्छी वैल्यू पर ध्यान दे रहे हैं. यही सोच अफोर्डेबल प्रीमियम फैशन को आगे बढ़ा रही है.
 

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