राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सड़क से संसद तक सियासी पारा हाई है. जंतर-मंतर पर जहां कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अगुवाई में छात्र धरने पर बैठे हैं, वहीं विपक्षी दलों ने संसद में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. विपक्ष नीट पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है. मॉनसून सत्र के शुरुआती तीन दिन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ चुकी है और चौथे दिन भी कार्यवाही बार-बार बाधित हुई.
विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट पेपर लीक को लेकर विस्तार से चर्चा की मांग कर रहा है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने दो टूक कह दिया है कि पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो, इसके बाद चर्चा होगी. विपक्ष ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हम नियम 267 के तहत चर्चा चाहते हैं. सरकार विपक्ष की शर्तों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं हैं. राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के व्यवहार को गैर जिम्मेदाराना बताया.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी लोकसभा में विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष जैसे ही शर्तें रखता है, सब समझ जाते हैं कि वह चर्चा से भाग रहा है. इन सबके बीच बहस का केंद्र बनकर उभरा है नियम 267. सरकार भी चर्चा के लिए तैयार है, इसके लिए कई नियमों का विकल्प भी है, लेकिन विपक्ष राज्यसभा में नियम 267 के तहत ही चर्चा की मांग पर क्यों अड़ा हुआ है?
नियम 267 के तहत चर्चा पर क्यों अड़ा विपक्ष?
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि नियम 267 के तहत चर्चा होती है, तो विपक्ष सीजेपी प्रोटेस्ट में छात्रों पर लाठीचार्ज को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' बताने की अपनी रणनीति में सफल रहेगा. इस नियम के तहत चर्चा होती है, तो चर्चा के बाद वोटिंग का प्रावधान भी है. अगर वोटिंग होती है, तो हर दल की लाइन क्लियर होती है.
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उन्होंने कहा कि विपक्ष के इसी नियम के तहत चर्चा की मांग पर अड़ने के पीछे एक प्रमुख वजह यह भी है कि छात्र-युवा तक यह संदेश जाए कि उनके प्रोटेस्ट और उस पर हुए लाठीचार्ज को लेकर किस दल की लाइन क्या है. अरविंद सिंह ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं है कि इस नियम के तहत सदन में चर्चा कभी हुई ही नहीं हो.
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अरविंद सिंह ने कहा कि एनडीए की सरकार के समय ही नोटबंदी पर इसी नियम के तहत संसद में चर्चा हुई थी. मनमोहन सिंह की सरकार के समय भी विपक्ष की डिमांड स्वीकार करते हुए सरकार ने इस नियम के तहत चर्चा कराई थी. कुल मिलाकर छह से सात मौके ऐसे आए हैं, जब राज्यसभा में किसी विषय पर नियम 267 के तहत चर्चा हुई है.
नियम 267 क्या है?
राज्यसभा की रूल बुक का नियम 267 स्थगन प्रस्ताव से संबंधित है. इस नियम के तहत अगर किसी विषय पर चर्चा को सभापति अनुमति देते हैं, तो उस दिन के लिए सदन की कार्यसूची में दर्ज सभी विषयों पर कार्य स्थगित हो जाता है. यानी प्रश्नकाल, शून्यकाल समेत सभी कार्य स्थगित कर दिए जाते हैं और सदन में केवल उसी विषय पर चर्चा होती है, जिस विषय पर स्थगन प्रस्ताव के नोटिस को चर्चा के लिए सभापति की ओर से अनुमति मिली होती है.