आजतक में असिस्टेंट एडिटर के पद पर काम कर रहे बिकेश तिवारी 16 वर्ष से अधिक समय से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में हैं. दो साल से अधिक समय तक राजनीतिक खबरों की जिम्मेदारी संभालने वाले बिकेश फिलहाल संसद की कार्यवाही कवर करते हैं, सरकार की नीतियों से जुड़ी जानकारी खबर के माध्यम सरल भाषा में आम जनता तक पहुंचाते हैं.
साल 2009 में राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र से जुड़कर पत्रकारिता की पिच पर डेब्यू करने वाले बिकेश को देश के सबसे पुराने हिंदी दैनिक में शुमार आज अखबार ने तराशा. एजुकेशन से लेकर कल्चर तक, देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में अलग-अलग बीट पर रिपोर्टिंग की. दैनिक जागरण के साथ करीब चार साल की पारी में आउटपुट की कप्तानी भी संभाली. उत्तर से पूर्वोत्तर तक, बतौर रिपोर्टर राजनीति कवर की. पंचायत से लेकर आम चुनाव तक, कई चुनाव कवर किए. यूपी चुनाव 2012, सिक्किम चुनाव 2014, पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव 2016, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 ग्राउंड से कवर किया. बिकेश अपने करियर में थोड़े समय के लिए पत्रिका की डिजिटल विंग से भी जुड़े रहे और साल 2017 के गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार के अनुमान वाली ग्राउंड रिपोर्ट चर्चा में रही.
गंगा और सरयु, दो पवित्र नदियों के बीच बसे बलिया जिले के द्वाबा क्षेत्र से आने वाले बिकेश तिवारी का ताल्लुक उस गांव से है, जहां से यूपी के पूर्व सीएम कमलापति त्रिपाठी की जड़ें जुड़ी हुई हैं. 12वीं तक साइंस वर्ग के छात्र रहे बिकेश ने अर्थशास्त्र से एमए किया और फिर वाराणसी के काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर, एमफिल की पढ़ाई की. पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रोफेशनल करियर की शुरुआत वाराणसी से की और कारवां बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के रास्ते अब नोएडा तक पहुंच चुका है. दफ्तर से बाहर कानून की किताबें, कविताएं पढ़ने में रुचि है. कभी क्रिकेट का भी कीड़ा था.