अब केरलम में बच्चों के जंक फूडखाने की आदतों पर लगाम लगाई जाएगी. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने कहा है कि सरकार फैट, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले फूड प्रोडक्ट्स की पहचान और नियंत्रण के नियमों पर केंद्रिय खाद्य प्राधिकरण स्थिति साफ करने को कहेगी.
मंत्री ने सोमवार शाम जारी बयान में कहा कि राज्य भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण को पत्र लिखकर प्रस्तावित नियमों को जल्द अंतिम रूप देने की मांग करेगा. इन नियमों से जंक फूड प्रोडक्ट्स की पहचान करने और स्कूल परिसर में उनकी बिक्री को नियंत्रित करने या उस पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
मुरलीधरन ने कहा कि जंक फूड की सटीक वैज्ञानिक परिभाषा नहीं होने से यह साफ नहीं है कि किन खाद्य उत्पादों को इस श्रेणी में रखा जाए और उनकी बिक्री को कैसे नियंत्रित किया जाए. फैट, शुगर और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों को HFSS प्रोड्क्ट माना जा सकता है, लेकिन इन चीजों की मात्रा कब जरूरत से ज्यादा मानी जाएगी, इसके लिए साफ मानक जरूरी हैं.
उन्होंने कहा कि ऐसे मानक ना होने से उत्पादों की सूची तैयार करने और स्कूलों के आसपास उनकी बिक्री नियंत्रित करने में मुश्किल हो रही है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने 7 अगस्त को मसौदा नियम जारी किए थे. इनमें ठोस और लिक्विड खाद्य पदार्थों में वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा की पहचान के लिए अलग-अलग सीमा प्रस्तावित की गई है.
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प्रस्ताव के मुताबिक, ठोस खाद्य पदार्थों में प्रति 100 ग्राम पर 4.2 ग्राम से अधिक वसा, 3 ग्राम से अधिक चीनी और 0.625 ग्राम से अधिक नमक होने पर संबंधित सीमा पार मानी जाएगी.
तरल खाद्य पदार्थों के लिए प्रति 100 मिलीलीटर पर 1.5 ग्राम से अधिक वसा, 2 ग्राम से अधिक चीनी और 0.175 ग्राम से अधिक नमक की सीमा प्रस्तावित है. राज्य ने कहा कि इन नियमों को अंतिम रूप देकर कानूनी ढांचे में शामिल करना जरूरी है. इससे ऐसे उत्पादों की पहचान और स्कूल परिसर में उनकी बिक्री रोकने का साफ आधार मिलेगा.
स्कूलों और दूसरे संस्थानों में हो रहे बदलाव
नियामक उपायों के साथ केरलम बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने और स्वस्थ खानपान की आदतें बढ़ाने के लिए कार्यक्रम चला रहा है. सही भोजन स्कूल पहल अब तक आदर्श आवासीय स्कूलों सहित 169 स्कूलों में लागू की गई है. इसका मकसद स्कूल और छात्रावास की कैंटीन में खाद्य सुरक्षा, साफ-सफाई और संतुलित पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.
मंत्री ने बताया कि बच्चों को पोषण की व्यावहारिक जानकारी देने वाला स्कूल में सुरक्षित और पौष्टिक भोजन कार्यक्रम 2,500 स्कूलों में लागू किया गया है. कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और सरकारी संस्थानों की कैंटीन में सुरक्षित और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने वाली सही भोजन परिसर पहल के तहत 456 संस्थानों को प्रमाणपत्र मिला है.