संसद में आज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी. यह मामला मार्च 2025 का है, जब दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद स्टोर रूम से कथित तौर पर जली हुई नकदी मिली थी. इसके बाद उनके खिलाफ जांच शुरू हुई और उन्हें पद से हटाने की मांग उठी.
यह विवाद पिछले साल मार्च का है, 14 मार्च को 2025 को जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगी थी. इसी दिन से यह पूरा मामला चर्चा में आया है. सूत्रों के मुताबिक, जब आग लगी तब जस्टिस वर्मा शहर में नहीं थे. उनके परिवार ने दमकल विभाग और पुलिस को सूचना थी. दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंची. उन्होंने आग पर काबू पाया गया. लेकिन मामले में मोड़ तब आया जब दमकल विभाग की टीम स्टोर रूम में आग बुझाने पहुंची. आग बुझाने के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नकदी के बंडल करीब डेढ़ फीट ऊंचे तक रखे हुए थे.
बताया गया कि कमरे में 500-500 रुपये के नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे. आग लगने पर यह नोट जल गए थे. इस मामले पर जब जवाल उठे कि आखिर जस्टिस वर्मा के घर इतना कैश कहां से आया, उसके बाद से इस मामले ने तूल पकड़ लिया.
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मामला जब चर्चा में आया तो तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया. मामला बढ़ा तो उनके खिलाफ 200 से ज्यादा सांसदों ने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी. हालांकि अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था. लेकिन राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया है.
कैश बरामदगी के समय वह दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे. विवाद के बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया. अब बड़ा सवाल यह है कि इस्तीफा देने के बावजूद क्या जस्टिस वर्मा को पद से हटाया जा सकता है? जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मुद्दे पर संसद में चर्चा हो सकती है.