प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने के मामले पर संसद की सूचना प्रौद्योगिकी समिति ने कड़ा रुख अपनाया है. समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा के हेड मार्क जुकरबर्ग को इस लापरवाही के लिए खुद माफी मांगनी चाहिए.
बीजेपी सांसद ने मेटा से 10 दिनों के भीतर लिखित में जवाब मांगा है. 'सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनका नियमन' पर आयोजित संसदीय समिति की बैठक लगभग तीन घंटे तक चली. इसमें मेटा के प्रतिनिधियों से सख्त सवाल पूछे गए.
बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन के अलावा स्नैपचैट, गूगल, एक्स (ट्विटर), मेटा और यूट्यूब के प्रतिनिधि पेश हुए.
निशिकांत दुबे ने कहा, 'मेटा के प्रतिनिधियों ने खुद स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री का वीडियो पांच घंटे तक गायब रहा. ये रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक प्लेटफॉर्म पर नहीं था. ये बेहद गंभीर मामला है और मार्क जुकरबर्ग को खुद माफी मांगनी चाहिए.'
'सेफ हार्बर' सुरक्षा वापस लेने की चेतावनी
दुबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मार्क जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो आईटी कानून की धारा 79 के तहत मेटा को मिली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए. इस धारा के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके यूजर्स के पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से छूट मिलती है.
संसदीय समिति के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मेटा का रवैया देश को अस्थिर करने वाला है. उन्होंने कहा कि 2024 में भी मार्क जुकरबर्ग ने संसदीय चुनाव परिणामों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं और कंपनी गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेती.
पेपर लीक पर पीएम के संदेश से जुड़ा है मामला
बता दें कि पीएम मोदी ने एक फेसबुक पोस्ट में युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था. इस वीडियो को प्लेटफॉर्म पर कुछ समय के लिए बैन कर दिया गया था. हालांकि मेटा ने इसे एक 'टेक्निकल एरर' बताते हुए गलती से हटने का दावा किया था, लेकिन आईटी मंत्रालय ने इस जवाब को अपर्याप्त माना था.
अल्गोरिदम और जवाबदेही पर उठे सवाल
बैठक के दौरान सांसदों ने पूछा कि जब फेसबुक पर महिलाओं और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट मुहैया रहता है, तो प्रधानमंत्री के सही वीडियो को किसने और क्यों हटाया? सांसदों ने इसके लिए अंतिम जवाबदेही तय करने की मांग की.
यह भी पढ़ें: भारत में फिलहाल नहीं आएगा WhatsApp का Username फीचर, मेटा का बड़ा फैसला
सूत्रों के मुताबिक, मेटा के अधिकारियों ने बैठक में इस घटना पर खेद जताया और माफी मांगने की बात कही. वहीं, विपक्ष के सांसदों ने कहा कि सोशल मीडिया पर असहमति की जगह होनी चाहिए और सरकार विरोधी कंटेंट को देश विरोधी नहीं माना जाना चाहिए.