संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और इस दौरान नीट पेपर लीक को लेकर 'जेन-जी' का प्रदर्शन से लेकर राम मंदिर चंदा चोरी तक जैसे मुद्दों को लेकर संसद में हंगामा मचा है. विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि गृह मंत्री अमित शाह इन मुद्दों पर सदन में चर्चा करें.
इस बीच सरकार ने दो बेहद अहम विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संपर्क साधा है. ये दो विधेयक हैं- विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में संशोधन और परिसीमन से जुड़ा प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक.
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को संसद भवन में राहुल गांधी से लगभग 50 मिनट तक मुलाकात की. इससे कुछ ही दिन पहले दोनों नेताओं के बीच फोन पर भी बातचीत हुई थी. ऐसे में सवाल ये है कि क्या देश भर में चले लंबे युवा आंदोलन ने सरकार को टकराव की नीति छोड़कर सहमति का रास्ता चुनने पर मजबूर कर दिया है?
जंतर-मंतर पर चला विरोध प्रदर्शन, संसद का पूरी तरह ठप होना और हाल ही में बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनावों में बीजेपी को मिली हार- ये सभी घटनाएं इशारा करती हैं कि मोदी सरकार अब विधेयकों को पास कराने के लिए लचीला रुख अपना रही है.
सरकार का राहुल गांधी से संपर्क सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं है. केंद्र सरकार अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी और एमके स्टालिन की डीएमके सहित दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं से भी चर्चा करने की कोशिश कर रही है.
परिसीमन और महिला आरक्षण पर फोन पर चर्चा
संसद में हुई बैठक के बाद गुरुवार को किरण रिजिजू ने एक बार फिर राहुल गांधी से फोन पर बात की. इस बातचीत का विषय परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक था. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, रिजिजू ने तर्क दिया कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन विधेयक का समर्थन करना बेहद जरूरी है.
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने इस पर जवाब दिया कि कांग्रेस इस विषय पर पहले पार्टी में और फिर 'इंडिया' गठबंधन के अपने सहयोगी दलों के साथ चर्चा करेगी, उसके बाद ही अपना आखिरी रुख सरकार के सामने रखेगी.
सदन चलाने पर कांग्रेस की अपनी शर्तें
सरकार की इस पहल के बावजूद संसद में जारी बवाल पूरी तरह थम नहीं पाया है. कांग्रेस इस बात पर अड़ी हुई है कि संसद की कार्यवाही तभी सही से चल सकती है, जब गृह मंत्री अमित शाह छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर अपना जवाब दें और अयोध्या में राम मंदिर की 'चंदा चोरी' पर चर्चा कराई जाए.
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान दो विधेयकों- प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का रुख जानना चाहा. इस बैठक में कांग्रेस की ओर से वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई भी शामिल थे.
युवा आंदोलन का असर या रणनीति में बदलाव?
जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार का ये नया लचीला रुख हाल के सालों के सबसे बड़े राजनीतिक संकट का नतीजा है. नीट धांधली को लेकर 'जेन-जी' के उग्र प्रदर्शन और दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई के कारण धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था.
वहीं, विश्लेषकों का ये भी कहना है कि बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी के हाथों बीजेपी को मिली हार ने भी सरकार को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है.
रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के साथ उनकी बैठक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद को बहाल करने की एक कोशिश थी. हालांकि, उन्होंने बताया कि जारी सत्र की अवधि बढ़ाने या 16 से 18 अगस्त के बीच कोई विशेष सत्र बुलाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है.
विपक्ष से समर्थन की सरकार को क्यों है जरूरत?
केंद्र सरकार के लिए संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का समर्थन हासिल करना इस समय बेहद जरूरी हो गया है. परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी.
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इस साल के शुरू में विस्तारित बजट सत्र के दौरान सरकार जरूरी संख्या बल जुटाने में नाकाम रही थी, जिससे मोदी सरकार को पहली बार किसी संविधान संशोधन विधेयक पर हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के NCPI में शामिल होने और शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय के बाद एनडीए का संख्या बल सुधरा है, लेकिन सरकार के पास अभी भी संविधान संशोधन के लिए जरूरी पूर्ण दो-तिहाई बहुमत नहीं है.