नई दिल्ली में ऐसेट रिकवरी इंटरजेंसी नेटवर्क, एशिया पैसिफिक पर बोधित करते हुए ED के मुखिया ने बड़ा सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है कि करोड़ों का काला धन पकड़ने का क्या फायदा, अगर वो रकम पीड़ित तक पहुंचे ही नहीं? बुधवार को ARIN-AP की 11वीं सालाना बैठक में ED डायरेक्टर राहुल नवीन ने कहा कि केवल संपत्ति जब्त करना ही सफलता नहीं मानी जा सकती.असली कामयाबी तब है, जब जब्त की गई रकम और संपत्ति वापस पीड़ितों को या सरकारी खजाने को मिले.
तीन दिन तक चली ये बैठक भारत की अध्यक्षता में ED ने होस्ट की थी. इस बार की थीम थी "Closing the Loop: From Tracing to Return" यानी अपराध के पैसे को खोजने से लेकर लौटाने तक का पूरा सफर. राहुल नवीन ने कहा कि एसेट रिकवरी एक लगातार चलने वाली चेन है. पहले अवैध संपत्ति को ट्रेस करना, फिर कोर्ट से जब्त करने का आदेश लेना, फिर उस संपत्ति को संभाल कर रखना और आखिर में उसे लौटाना.
उन्होंने कहा कि जनता कानून व्यवस्था को इस बात से नहीं आंकती कि आपने कितना पकड़ा, बल्कि इस बात से आंकती है कि आपने लौटाया कितना. पीड़ित को पैसा वापस देना, सरकारी खजाने में जमा करना और जब्त संपत्ति का सामाजिक इस्तेमाल ही असली मकसद होना चाहिए. उन्होंने एक बड़ी खामी की तरफ भी इशारा किया. जांच एजेंसी सिर्फ संपत्ति ढूंढने में लगी रहती है, वकील कोर्ट ऑर्डर पर ध्यान देते हैं, और मैनेजर कस्टडी पर, लेकिन इस सब में पीड़ित इंसाफ का इंतजार ही करता रह जाता है.
क्रिप्टो और विदेशी मदद बनी बड़ी चुनौती
इस दौरान क्रिप्टोकरेंसी पर भी चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि अपराधी वर्चुअल करेंसी के जरिए पलक झपकते ही पैसा देश से बाहर भेज देते हैं. इसे पकड़ने के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स से तुरंत संपर्क, ब्लॉकचेन एनालिटिक्स और विदेशी एजेंसियों से तेज मदद जरूरी है. इंटरपोल के सिल्वर नोटिस के शुरुआती अनुभव और बॉर्डर पार संपत्ति की ट्रेसिंग पर भी बात हुई.
ED डायरेक्टर ने जोर देकर कहा कि एजेंसियों के बीच अनौपचारिक बातचीत तभी कारगर होगी, जब उसे औपचारिक कानूनी रिक्वेस्ट के साथ जोड़ा जाए. बैठक में बिना सजा के संपत्ति जब्ती पर भी मंथन हुआ.इसमें किन मामलों में बिना सजा के भी संपत्ति जब्त हो सकती है और कोर्ट में इसे कैसे टिकाया जाए, इस पर चर्चा हुई. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जब्ती के पहले दिन से ही संपत्ति के रखरखाव की प्लानिंग न की गई, तो उसकी कीमत घट सकती है.
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भारत ने दिखाया पीड़ितों को पैसा लौटाने का रास्ता
राहुल नवीन ने भारत के PMLA कानून 2002 के तहत बड़े पैमाने पर पीड़ितों को संपत्ति लौटाने का अपना अनुभव साझा किया. कैसे जब्त पैसा सीधे पीड़ितों को दिया जाए, सरकारी खजाने में जमा किया जाए या जब्त घरों-जमीनों का पब्लिक यूज में इस्तेमाल हो, इस पर अलग-अलग मॉडल्स पर चर्चा हुई. FATF की सिफारिश 4 और 38 में हुए नए बदलावों पर भी विचार किया गया. राहुल नवीन ने कहा कि ये बदलाव आने वाले दिनों में सभी देशों के मूल्यांकन को तय करेंगे. ED डायरेक्टर ने उम्मीद जताई कि इस बैठक का असली फायदा तब मिलेगा, जब एक देश दूसरे देश से मदद मांगेगा और पहले से बनी जान-पहचान के कारण तुरंत कार्रवाई होगी.