दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर धांधली और भ्रष्टाचार के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ABC) ने पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन और पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. एसीबी ने सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर दर्ज FIR संख्या 10/2024 के तहत ये कार्रवाई की है, जबकि सत्येंद्र जैन ने अपनी इस गिरफ्तारी को पंजाब चुनाव से जोड़ा है. उन्होंने कहा कि ये पंजाब चुनावों की वजह से किया जा रहा है. तो मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सब कार्रवाई कैग रिपोर्ट के आधार पर की जा रही हैं.
वहीं, अदालत में पेशी के दौरान एसीबी ने सत्येंद्र जैन की न्यायिक हिरासत की मांग की, जबकि जैन के वकील एन हरिहरन ने गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बताते हुए नियमित जमानत अर्जी दाखिल की है.
अदालत में जोरदार बहस
अदालत की कार्यवाही शुरू होते ही सत्येंद्र जैन के वकील ने उनके मेडिकल रिकॉर्ड देखने की अनुमति मांगी. इसके साथ ही जैन की तरफ से जमानत याचिका दाखिल की गई और गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी गई. जैन के वकील एन हरिहरन ने दलील दी कि मामले की FIR दर्ज होने के 27 महीने बाद यह गिरफ्तारी की गई है. उन्हें जांच के लिए सिर्फ एक बार 5 अगस्त को बुलाया गया था और उसके बाद बिना किसी नोटिस के महज फोन कर बुलाकर गिरफ्तार कर लिया गया.
20 करोड़ के नुकसान का झूठा आरोप
जैन के वकील ने कहा कि एसीबी द्वारा पेश कंटेंट के आधार पर गिरफ्तारी बिल्कुल भी उचित नहीं है. एसीबी का आरोप है कि जैन ने मनमाने ढंग से एक एसटीपी की स्थिति बदल दी, जबकि फाइलों की नोटिंग और फैक्ट्स दिखाते हैं कि ऐसा कोई बदलाव कभी लागू ही नहीं हुआ था.
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस नोटिंग की बात कर विभाग को 20 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया जा रहा है, वह नोटिंग कभी हुई ही नहीं थी. आरोपी नागेंद्र यादव के वकील ने भी दलील दी कि जिसे ईडी ने गिरफ्तार नहीं किया, उसे एसीबी गिरफ्तार कर रही है.
टेंडर में हेरफेर
एसीबी के संयुक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह के अनुसार, जांच में सामने आया कि टेंडर में यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए तकनीकी शर्तों में हेरफेर की गई थी. पायलट स्टडी नहीं कराई गई और जरूरी पैरामीटर हटा दिए गए. वित्तीय जांच में सामने आया कि यूरोटेक से जुड़ी यूनिटों ने मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज (नागेंद्र यादव) और मेसर्स सृजनहार (पंकज वर्मा) के जरिए कमीशन का पैसा घुमाया. तत्कालीन सीईओ उदित प्रकाश राय को 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत उनके और रिश्तेदारों के बैंक खातों में मिली है, जिससे अचल संपत्ति खरीदी गई.
टेंडर की टाइमलाइन
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस टेंडर की पूरी प्रक्रिया 2021 में शुरू हुई थी, जब सत्येंद्र जैन जल मंत्री पद पर थे. 7 अक्टूबर 2021 को आईएफएएस तकनीक प्रस्तावित हुई, जिसे 14 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन ने सैद्धांतिक मंजूरी दी. 21 और 23 दिसंबर 2021 को जैन, सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और सीईओ उदित प्रकाश राय की बैठक में टीओआर तय हुआ. 28 दिसंबर 2021 के प्रस्ताव से 1,546.32 करोड़ रुपये का नया एस्टीमेट बना. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पता चला कि टेंडर जारी होने से पहले ही गोपनीय शर्तें आरोपियों के फोन पर साझा की जा रही थीं. 17 मई 2022 को टेक्निकल बिड खुली और 30 मई 2022 को अप्रूव हुई थी.
पंजाब चुनाव की वजह से हुई गिरफ्तार
उधर, सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद पूरी आम आदमी पार्टी केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमलावर है. गिरफ्तारी के बाद सत्येंद्र जैन ने बयान दिया कि यह पूरी कार्रवाई पंजाब चुनावों की वजह से की गई है.
गृह मंत्री के निर्देश पर गिरफ्तारी का दावा
वहीं, अरविंद केजरीवाल ने एसीबी के एक अधिकारी के हवाले से दावा किया कि एसीबी का मंगलवार सुबह तक जैन को गिरफ्तार करने का कोई प्लान नहीं था. फिर दोपहर में अमित शाह का सीधे फोन आया कि गिरफ्तार कर लो. तब सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया गया.
उन्होंने आगे कहा कि जाहिर है कि अब गिरफ्तारी इस बात से नहीं होती कि किसी ने कोई गुनाह किया है या नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वो दोनों किसे गिरफ्तार करना चाहते हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि गृह मंत्री बताएं कि उन्होंने जांच एजेंसी पर दबाव डालकर सत्येंद्र जैन को क्यों गिरफ्तार करवाया.
एक अन्य पोस्ट में केजरीवाल ने कहा, 'गिरफ्तारी तब की जाती है जब पुलिस को उस व्यक्ति से पूछताछ और जांच करनी हो. सत्येंद्र जैन की पुलिस ने कस्टडी ही नहीं ली, इसका मतलब सत्येंद्र से कोई पूछताछ नहीं करनी. केवल अमित शाह के दबाव के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया है.
CAG रिपोर्ट के आधार पर की गई कार्रवाई
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर बोलते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 19 कैग रिपोर्ट सदन के पटल पर पेश की गई, पिछली सरकारों के दौरान एक-एक घोटाला जो आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान हुआ था. उसे घोटाले को प्रस्तुत करता है.
उन्होंने कहा कि सभी कार्रवाई कैग रिपोर्ट के आधार पर चल रही हैं. एजेंसी अपना काम कर रही है और जो बीज बोया हैं, वह सामने तो आएंगे ही... सतेंद्र जैन ने जो स्कैम जल बोर्ड में किया था.. उसी नाते से वो जेल गए हैं और कार्रवाई चल रही है.