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दिल्ली में बिजली कंपनियों का होगा CAG ऑडिट, LG ने दी मंजूरी, 38 हजार करोड़ के बकाए का खुलेगा राज

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए तीनों प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का पहली बार कैग ऑडिट की मंजूरी दे दी है. सरकार ने ये कदम पावर सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.

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दिल्ली में बिजली कंपनियों का होगा कैग ऑडिट. (सांकेतिक फोटो)
दिल्ली में बिजली कंपनियों का होगा कैग ऑडिट. (सांकेतिक फोटो)

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने जनता के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए तीनों प्रमुख बिजली डिस्कॉम- बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टीपीडीडीएल के कैग (CAG) ऑडिट को मंजूरी दे दी है. उपराज्यपाल से हरी झंडी मिलने के बाद अब तीन महीने के अंदर इस व्यापक ऑडिट प्रक्रिया को पूरा करने का टारगेट तय किया गया है.

दिल्ली के मंत्रिमंडल ने 20 जून 2025 को इस सख्त ऑडिट की सिफारिश की थी, जिसे अब उपराज्यपाल ने सार्वजनिक हित में अपनी अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है.

3 महीने में पूरा करना होगा ऑडिट

उपराज्यपाल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की टीम को इस जटिल ऑडिट को शुरू होने के तीन महीने के अंदर अधिमानतः पूरा करना होगा.

आदेश में साफ किया गया है कि बीआरपीएल, बीवाईपीएल और टाटा पावर (टीपीडीडीएल) समेत सभी संबंधित बिजली कंपनियां और अधिकारी कैग के अधिकारियों को सभी जरूरी डॉक्यूमेंट, वित्तीय रिकॉर्ड और जानकारी उपलब्ध कराकर पूरा सहयोग करेंगे. ये पूरी वित्तीय जांच पावर सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के साथ-साथ कंपनियों के रेगुलेटरी एसेट्स की जांच के लिए शुरू की जा रही है.

सामने आएगा बकाए का सच

पावर मंत्री आशीष सूद ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि ऑडिट में रेगुलेटरी एसेट्स की विस्तृत जांच होगी और 38,000 करोड़ रुपये के बकाए का सच भी सामने आएगा.  हालांकि, दिल्ली सरकार का कहना है कि बिजली कंपनियां मुनाफे में हैं.

दिल्ली में निजी बिजली कंपनियों के खातों की कैग से जांच कराने की सबसे पहली मांग अरविंद केजरीवाल ने उठाई थी. हालांकि, तमाम राजनीतिक और कानूनी अड़चनों के कारण वो अपने लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान इन कंपनियों का कैग ऑडिट नहीं करा पाए. अब रेखा गुप्ता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और कैग की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद इस प्रक्रिया को कानूनी अंजाम तक पहुंचा दिया है.

बता दें कि  ये बड़ा प्रशासनिक फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगस्त 2025 में दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद लिया गया है. इससे पहले बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (एपटेल) और दिल्ली हाईकोर्ट में नोटिसों को चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने याचिकाओं को समय से पहले मानकर खारिज कर दिया. इसके बाद सरकार ने कंपनियों को व्यक्तिगत सुनवाई का पूरा मौका देकर इस जांच का रास्ता साफ किया.

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