कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और उससे जुड़े विवाद के बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि मीडिया में उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के लिए खुला है और किसी भी मामले की सुनवाई से कभी इनकार नहीं करता.
यूएनसीआईटीआरएएल (UNCITRAL) कॉन्फ्रेंस के इतर आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट सभी लोगों के लिए खुला है. हम 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध हैं. सुप्रीम कोर्ट कभी भी किसी भी मुद्दे पर सुनवाई करने से इनकार नहीं करता.' चीफ जस्टिस ने बताया कि छात्र आंदोलन से जुड़ी जिन याचिकाओं का शुक्रवार को अदालत के समक्ष उल्लेख किया गया, उन्हें सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत सभी के लिए खुली है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना भी जरूरी है. उन्होंने कहा, 'अगर आप सिर्फ एक पत्र भेजकर कहें कि आपकी याचिका पर तुरंत सुनवाई होनी चाहिए, तो ऐसा नहीं हो सकता. अदालत तय प्रक्रिया के अनुसार ही मामलों की सुनवाई करती है.'
यह विवाद उस टिप्पणी के बाद शुरू हुआ, जो सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका का उल्लेख किए जाने के दौरान की थी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस की ज्यादती से जुड़े वीडियो का हवाला देते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी. इस पर सीजेआई ने कहा था, 'हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है. हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है.' पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए यह भी कहा था कि केवल अदालत को पत्र भेज देने भर से किसी मामले को तुरंत सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता.
CJP पर टिप्पणी से किया इनकार
जब मुख्य न्यायाधीश से यह पूछा गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी पहले की टिप्पणी के बाद ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन हुआ, तो उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए सिर्फ इतना कहा, 'नो कमेंट्स'.
कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से दुनिया के सामने भारत की न्यायिक व्यवस्था, तकनीकी प्रगति और विकास को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है. उन्होंने कहा, 'न्यायिक सहयोग सभी के लिए लाभकारी होगा और इससे दुनिया के सामने भारत के विकास और तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी.'