जंतर मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें चर्च के पादरी जैसे दिखने वाले कुछ लोग सड़क पर मार्च करते हुए नजर आ रहे हैं. वीडियो रात के वक्त का है, और पादरियों के पीछे बहुत सारे लोग भी देखे जा सकते हैं.
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि वीडियो में दिख रहे ये पादरी FCRA संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर आए हैं, क्योंकि इस बिल के जरिए विदेशी चंदा लेकर धर्मांतरण करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी. ये विधेयक मार्च 2025 में लोकसभा में पेश किया गया था. और संसद के मानसून सत्र में इस पर चर्चा होनी है.
वीडियो का एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए फेसबुक पर एक व्यक्ति ने लिखा, “जंतर मंतर पर कई चर्च के पादरी काॅकरोचों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए देखे गए है... FCRA संशोधन ने इकोसिस्टम तंत्र को जड़ से प्रभावित किया है. अब आये काॅकरोचों के असली फादर.”

कुछ लोग इस वीडियो को ये कहकर भी शेयर कर रहे हैं, कि चर्च के ये पादरी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ही खास तौर पर दिल्ली आए हैं.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो दिल्ली नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मेरठ का है, जहां ईसाई समाज के लोगों ने एक धार्मिक यात्रा निकाली थी.
कैसे पता की सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये Shalam Chauhan नाम के इंस्टाग्राम यूजर के पोस्ट में मिला. यहां इसे 8 मई को पोस्ट किया गया था. पोस्ट के साथ Shalam ने बताया कि ये वीडियो मेरठ का है और इसमें दिख रहे लोग ईसाई धर्म के हैं.
ज्यादा जानकारी के लिए हमने Shalam से बात की. उन्होंने हमें बताया कि ये वीडियो उन्होंने खुद रिकार्ड किया था. ईसाई समुदाय से जुड़े लोगों ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में बेगमपुल से लेकर सरधना तक एक यात्रा की थी. ये वीडियो उसी वक्त का है. Shalam ने हमें उस दिन के कुछ और वीडियो भी भेजे.
हमें दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट भी मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, ये मेरठ में ईसाई समाज की हर साल निकलने वाली पैदल यात्रा है. ये धार्मिक यात्रा बेगमपुल स्थित सेंट जोसेफ चर्च से लेकर सरधना चर्च तक निकाली गई थी, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए थे. रास्ते में स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इनका फूल-मालाओं से स्वागत किया. यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन काफी सतर्क था और रास्ते में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.
क्या है FCRA?
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला FCRA यानी 'फॉरेन कॉन्ट्रिब्युशन रेग्युलेशन एक्ट' एक ऐसा कानून है जिसके जरिए विदेश से आने वाले फंड, डोनेशन (चंदे) और किसी भी तरह के आर्थिक लेनदेन को नियंत्रित किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य ये सुनिश्चित करना होता है कि विदेशी पैसे का इस्तेमाल देश की आंतरिक सुरक्षा, राजनीति या राष्ट्रीय हित के खिलाफ न हो.
इसके नियमों को और सख्त बनाने के लिए सरकार ने 25 मार्च, 2026 FCRA संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया था. ये संशोधन विधेयक इस वक्त संसद में विचाराधीन है. लेकिन सरकार ने 22 जून, 2026 को संशोधित FCRA नियम अधिसूचित (नोटिफाई) करके इसे लागू कर दिया. कैथोलिक चर्च ने संशोधित नियमों को लेकर अपनी चिंता जताई है. दरअसल, कैथोलिक संस्थाओं को सरकारी दखलअंदाजी और अपने संस्थानों के वजूद को लेकर चिंता है. उनकी मुख्य नाराजगी इस बात को लेकर है कि अगर नए नियमों के तहत उनका FCRA लाइसेंस कैंसिल या लैप्स होता है, तो सरकारी अधिकारी को उनकी प्रॉपर्टी, फंड और एसेट्स जब्त करने का अधिकार मिल जाएगा. चर्च लीडर्स का कहना है कि इससे उनके वेलफेयर नेटवर्क पर संकट आ सकता है.
भारत में कैथोलिक चर्च की सबसे बड़ी संस्था, 'कैथोलिक विशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया' (CBCI) ने इस विधेयक के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह को 10 जुलाई, 2026 को एक ज्ञापन सौंपा है.
इस तरह हमारी पड़ताल से ये बात साबित हो जाती है कि मेरठ में निकाली गई एक धार्मिक यात्रा को विरोध प्रदर्शन का बताकर शेयर किया जा रहा जो कि एकदम गलत है. हालांकि ये बात सच है कि इससे पहले कैथोलिक चर्च से जुड़े लोग FCRA संशोधन विधेयक का विरोध कर चुके हैं.
लेकिन जहां तक सवाल वायरल वीडियो का है, तो ये न तो FCRA के विरोध से संबंधित है और न ही इसका कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से कोई लेना-देना है.