बिहार में आरक्षण को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और HAM के नेताओं के बीच जारी बयानबाजी के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोला है. तेजस्वी यादव ने कहा कि अभी तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ है, जो आरक्षण को खत्म कर सके. उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी और आरएसएस अपने सहयोगी नेताओं के जरिए लोगों का मिजाज जानने की कोशिश कर रहे हैं.
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'गुड़ खाएं, गुलगुले से परहेज!' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान आरएसएस के निर्देश पर आरक्षण को लेकर अलग बयानबाजी कर रहे हैं. उनका दावा है कि इसके जरिए बीजेपी-आरएसएस आरक्षण समर्थक जनभावना का आकलन करना चाहते हैं.
आरक्षण को लेकर जारी बयानबाजी पर मीडिया से बातचीत में भी तेजस्वी ने दोनों नेताओं को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर बोलने वालों के पास 'नागपुर से संदेश' आता है कि किसे पक्ष में और किसे विपक्ष में बोलना है. उन्होंने कहा, 'अभी तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ है, जो आरक्षण को खत्म कर सके.'
तेजस्वी ने कहा कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी ने आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ा और आरक्षण का लाभ लेकर मंत्री बने. अगर उन्हें आरक्षण से परेशानी है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर सामान्य सीट से चुनाव लड़कर देखना चाहिए. आरजेडी नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की पार्टियों की आरक्षण को लेकर विचारधारा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर ये पार्टियां आरक्षण समर्थक हैं तो उनकी सरकार के दौरान बिहार में बढ़ाई गई 65 फीसदी आरक्षण सीमा को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल क्यों नहीं करातीं?
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस लंबे समय से आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रहे हैं और चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, जेडीयू और आरएलएम के नेता उन्हीं के साथ खड़े हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता समाज और विचारधारा के बजाय 'मलाई और कुर्सी' के लिए राजनीति कर रहे हैं.
तेजस्वी यादव ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 2015 में आरक्षण की समीक्षा को लेकर दिए गए बयान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस समय बिहार की जनता ने बीजेपी को इसका जवाब दिया था. तेजस्वी ने आरक्षण पर मौजूदा विवाद को बीजेपी का कराया हुआ 'ड्रामा' बताते हुए दावा किया कि पार्टी सहयोगी नेताओं के जरिए लोगों का मिजाज नापने की कोशिश कर रही है.
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मंच के कथित शुद्धिकरण के मामले में राहुल गांधी की ओर से कार्रवाई की मांग का तेजस्वी यादव ने समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इस मामले में कार्रवाई किए जाने की जरूरत है.