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चार दशक में 202 मौतें... कब थमेगा असम का खूनी सीमा विवाद?

असम की सीमाओं पर दशकों से सुलग रहा विवाद स्थानिय लोगों के लिए अब भी चुनौती बना हुआ है. सरकारी दस्तावेजों के आंकड़े दिखाते हैं कि इन विवादों ने अब तक कितने लोगों की जानें ली हैं.

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असम में दशकों से चल रहे सीमा विवाद में अब तक 202 लोग मारे जा चुके हैं. (Photo-PTI)
असम में दशकों से चल रहे सीमा विवाद में अब तक 202 लोग मारे जा चुके हैं. (Photo-PTI)

असम में जारी सीमा विवाद सिर्फ जमीनी लकीरों तक सीमित नहीं रहा है, दशकों से अब तक इस विवाद ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है. असम की नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम से लगी सीमाओं पर करीब चार दशक में हुए टकरावों में 202 लोगों की जान जा चुकी है. सरकारी दस्तावेजों के हवाले से सामने आया यह  आंकड़ा बताता है कि पूर्वोत्तर में सीमा विवाद आज भी कितना संवेदनशील मुद्दा है.

गोलाघाट में सबसे ज्यादा मौतें
असम सरकार के बॉर्डर प्रोटेक्शन एंड डेवलपमेंट विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 1989 से अब तक इन चार राज्यों के साथ सीमा विवादों में 202 असमवासियों की मौत हुई है. इनमें सबसे ज्यादा 142 मौतें गोलाघाट, 34 कछार और 15 बिस्वनाथ में हुईं हैं. वहीं कामरूप में चार, जबिक पश्चिम कार्बी आंगलोंग, धीमाजी और कार्बी आंगलोंग में दो-दो मारे गए. जोरहाट में भी एक व्यक्ति की जान गई. ताजा घटनाओं में 10 अगस्त को धीमाजी में 12 लोग घायल हुए थे. आरोप है कि जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद के दौरान अरुणाचल प्रदेश की ओर से कथित तौर पर गोलीबारी की गई थी.

83 हजार हेक्टेयर जमीन पर कब्जे का दावा
29 जुलाई को असम सरकार ने विधानसभा में बताया था कि करीब 83,000 हेक्टेयर जमीन पर अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय और मिजोरम के कब्जे का दावा है. इसमें नागालैंड 12,882.6 वर्ग किमी, मेघालय 2,732.14 वर्ग किमी, मिजोरम 927.74 वर्ग किमी और अरुणाचल प्रदेश 858.91 वर्ग किमी क्षेत्र पर अपना दावा करता है.
फॉर्मर स्पेशल DGP पल्लब भट्टाचार्य के मुताबिक, विवादों की बड़ी वजह सीमाओं का सही तरीके से तय ना होना और स्थानीय लोगों का प्रक्रिया में शामिल ना होना है. उनका सुझाव है कि विवादित इलाकों में दोनों राज्यों के लोगों को साथ लेकर केंद्र सरकार आर्थिक विकास की योजनाएं शुरू करे.

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चार राज्यों के साथ अलग-अलग विवाद
असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 804.1 किमी लंबी सीमा पर करीब 1,200 विवादित बिंदु हैं. दोनों राज्यों ने समाधान के लिए 12 रीजनल समितियां बनाई हैं. 2022 के नामसाई समझौते के बाद 123 गांवों से जुड़े विवाद को सुलझाने का सिलसिला शुरू हुआ. वहीं नागालैंड के साथ असम का 512.1 किमी सीमा विवाद सबसे पुराना है. 1965 के बाद 1968, 1979, 1985, 2007 और 2014 में बड़े टकराव हुए.

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मेघालय के साथ 884.9 किमी सीमा पर 12 विवादित क्षेत्र हैं. 2022 में छह क्षेत्रों के 36.79 वर्ग किमी विवाद पर समझौता हुआ था, जबकि छह क्षेत्र अब भी बाकी हैं. वहीं मिजोरम के साथ 164.6 किमी सीमा को लेकर 1875 और 1933 की अधिसूचनाओं पर मतभेद बना हुआ है.
हालांकि असम ने सीमा सुरक्षा के लिए 103 पुलिस बॉर्डर आउटपोस्ट बनाए हैं और 50 नए आउटपोस्ट का प्रस्ताव रखा है. सरकार का कहना है कि भविष्य में अतिक्रमण और हिंसक टकराव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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