scorecardresearch
 

गैंगस्टर अनिल दुजाना से एनकाउंटर में शहीद इंस्पेक्टर सुनील को राष्ट्रपति वीरता पदक, जिस मुठभेड़ में जान गई उसी ने दिलाया देश का बड़ा सम्मान

4 मई 2023... मेरठ का जानी इलाका. सामने था पश्चिमी यूपी का कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना और उसे घेरने पहुंची पुलिस टीम. गोलियां चलीं, मुठभेड़ हुई और इसी ऑपरेशन में इंस्पेक्टर सुनील कुमार शहीद हो गए. करीब तीन साल बाद उसी बहादुरी को राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मान मिला है. जिस दिन सुनील ड्यूटी पर निकले थे, उन्हें अंदाजा नहीं था कि वो ऑपरेशन उनकी जिंदगी का आखिरी मिशन बन जाएगा. अब उनकी वर्दी को मिला ये सम्मान उस शहादत की कहानी कह रहा है.

Advertisement
X
एनकाउंटर में शहीद हुए थे इंस्पेक्टर सुनील. (File Photo: ITG)
एनकाउंटर में शहीद हुए थे इंस्पेक्टर सुनील. (File Photo: ITG)

4 मई 2023. मेरठ का जानी थाना क्षेत्र. पुलिस टीम एक ऐसे गैंगस्टर को घेरने निकली थी, जिसके नाम से पश्चिमी यूपी में खौफ था. सामने था अनिल दुजाना. फिर गोलियां चलीं. मुठभेड़ हुई. अनिल दुजाना मारा गया, लेकिन पुलिस टीम ने भी अपना एक साथी खो दिया. इंस्पेक्टर सुनील कुमार ड्यूटी निभाते हुए शहीद हो गए. करीब तीन साल बाद उसी ऑपरेशन की बहादुरी को राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मान मिला है. यानी जिस एनकाउंटर में सुनील की जिंदगी खत्म हुई, उसी ने उनके नाम को देश के बड़े वीरता सम्मानों में दर्ज कर दिया.

कहानी 4 मई 2023 से शुरू होती है. मेरठ का जानी इलाका. पुलिस के सामने चुनौती थी गैंगस्टर अनिल दुजाना की. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अनिल दुजाना का नाम अपराध की दुनिया में लंबे समय से जाना जाता था. उसके खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे. पुलिस टीम ने उसे पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू किया.

anil dujana encounter martyred inspector sunil kumar president gallantry medal

इसके बाद जो हुआ, वो पुलिस की फाइल में एक एनकाउंटर के तौर पर दर्ज हो गया. लेकिन उस टीम के लिए ये सिर्फ एक केस नहीं था. मुठभेड़ शुरू हुई. दोनों तरफ से गोलियां चलीं. पुलिस टीम ने मोर्चा संभाला. इसी दौरान इंस्पेक्टर सुनील कुमार गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया. अनिल दुजाना मारा गया, लेकिन इस ऑपरेशन में पुलिस ने इंस्पेक्टर सुनील कुमार को खो दिया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: वीरता पुरस्कार से सम्मानित जवानों को मुफ्त रेल यात्रा की सौगात, माता-पिता को भी मिलेगा लाभ, सरकार ने जारी किया आदेश

करीब तीन साल बाद इंस्पेक्टर सुनील कुमार का नाम एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है राष्ट्रपति का वीरता पदक. उत्तर प्रदेश पुलिस के 12 कर्मियों को राष्ट्रपति के वीरता पदक से सम्मानित किया गया है. इनमें इंस्पेक्टर सुनील कुमार भी शामिल हैं. यानी जिस ऑपरेशन में उन्होंने अपनी जान गंवाई, उसी ऑपरेशन में दिखाई गई बहादुरी के लिए अब उन्हें देश का बड़ा वीरता सम्मान मिला है. ये सम्मान उस परिवार के लिए भी बेहद भावुक पल होगा, जिसने 4 मई 2023 को अपना अपना खोया था.

anil dujana encounter martyred inspector sunil kumar president gallantry medal

सुनील के साथ उस ऑपरेशन में कौन था?

अनिल दुजाना के खिलाफ इस ऑपरेशन में यूपी एसटीएफ की मेरठ यूनिट भी शामिल थी. इसी टीम के हेड कॉन्स्टेबल दीपक कुमार को भी राष्ट्रपति का वीरता पदक मिला है. और दीपक कुमार की कहानी यहां से और खास हो जाती है. उन्हें इस बार दो राष्ट्रपति वीरता पदक मिले हैं. एक अनिल दुजाना एनकाउंटर के लिए और दूसरा मुरादाबाद में हुए आसिफ टिड्डा एनकाउंटर के लिए. यानी एक ही पुलिसकर्मी की वर्दी पर दो वीरता पदक. 

दूसरा ऑपरेशन भी कम खतरनाक नहीं था

Advertisement

10 नवंबर 2025... मुरादाबाद... एसटीएफ की टीम एक और खतरनाक अपराधी के खिलाफ ऑपरेशन में थी. सामने था आसिफ टिड्डा. पुलिस के मुताबिक, आसिफ पर हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी जैसे अपराधों के 66 मुकदमे दर्ज थे. उसके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम था. उसके साथ उसका साथी दीनू भी था, जिस पर 50 हजार रुपये का इनाम बताया गया था. पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई.

anil dujana encounter martyred inspector sunil kumar president gallantry medal

इस ऑपरेशन में शामिल एसटीएफ की मेरठ यूनिट के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भी वीरता पदक दिया गया. इन्हीं में हेड कॉन्स्टेबल दीपक कुमार भी शामिल हैं. इस तरह दीपक कुमार के लिए ये सम्मान डबल हो गया- अनिल दुजाना और आसिफ टिड्डा, दोनों एनकाउंटर के लिए दो वीरता पदक.

इंस्पेक्टर सुनील कुमार की कहानी को सिर्फ एक मेडल की खबर के तौर पर देखना शायद इस कहानी को छोटा कर देना होगा. क्योंकि वीरता पदक के पीछे एक ऐसी घटना है, जिसमें एक पुलिसकर्मी वापस अपने घर नहीं लौट सके. 4 मई 2023 को वह ड्यूटी पर निकले थे. ऑपरेशन हुआ. मुठभेड़ हुई. और फिर खबर आई कि इंस्पेक्टर सुनील कुमार शहीद हो गए. उस वक्त उनके साथियों और परिवार पर क्या गुजरी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. अब उसी घटना का नाम जब सम्मान की सूची में आता है, तो कहानी का दूसरा पहलू सामने आता है.

Advertisement

राष्ट्रपति का वीरता पदक क्यों खास है?

देश की सुरक्षा में सेना के लिए जैसे वीरता के बड़े सम्मान होते हैं, वैसे ही आंतरिक सुरक्षा संभालने वाली पुलिस और पैरामिलिट्री के लिए राष्ट्रपति का Gallantry Medal बेहद महत्वपूर्ण सम्मान माना जाता है. ये सम्मान उन अधिकारियों और जवानों को दिया जाता है, जिन्होंने असाधारण साहस और जोखिम उठाकर ड्यूटी निभाई हो. इंस्पेक्टर सुनील कुमार के मामले में ये सम्मान इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी बहादुरी की कीमत उनकी अपनी जान थी.

इस बार उत्तर प्रदेश पुलिस के कुल 12 कर्मियों को राष्ट्रपति के वीरता पदक मिलने की जानकारी सामने आई है. मुरादाबाद के डीआईजी जी. मुनिराज को भी Gallantry Medal मिला है. वहीं यूपी एसटीएफ की मेरठ यूनिट के पांच कर्मियों को भी राष्ट्रपति का वीरता पदक दिया गया है. इसमें अनिल दुजाना और आसिफ टिड्डा जैसे अपराधियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशनों में शामिल पुलिसकर्मी हैं. 

अनिल दुजाना अब नहीं है. 4 मई 2023 की वो मुठभेड़ भी बीत चुकी है. जानी के उस ऑपरेशन को भी तीन साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है. लेकिन इंस्पेक्टर सुनील कुमार का नाम अब उस ऑपरेशन के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा. एक गैंगस्टर के खिलाफ ऑपरेशन में पुलिस ने कामयाबी हासिल की, लेकिन उसी ऑपरेशन में एक इंस्पेक्टर शहीद हो गए. वीरता की असली कहानी यही है. मेडल सिर्फ वर्दी पर नहीं लगता. वो उन यादों पर भी लगता है, जिन्हें एक परिवार जिंदगी भर अपने साथ लेकर चलता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement