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राखी भेजकर गई थी बहन, अब नेपाल बाढ़ में लापता... मुंबई के कजिन ने लगाई बहन को खोजने की गुहार

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक शीतल चौहान लापता हैं. 26 अगस्त को पासांग ल्हामू इलाके में बाढ़ आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया. बैग में लगे ट्रैकर से उनकी आखिरी लोकेशन बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में मिली. मुंबई में उनके कजिन ने तलाश तेज करने की अपील की है.

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बैग ट्रैकर से मिली आखिरी लोकेशन.(Photo: ITG)
बैग ट्रैकर से मिली आखिरी लोकेशन.(Photo: ITG)

नेपाल में आई बाढ़ के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गईं 48 वर्षीय शीतल चौहान के लापता होने से परिवार परेशान है. भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक शीतल अमेरिका के टेनेसी में रहती हैं. वह दूसरी बार कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गई थीं. 26 अगस्त को बाढ़ आने के समय वह पासांग ल्हामू इलाके में मौजूद थीं.

शीतल करीब 50 यात्रियों के एक समूह के साथ यात्रा कर रही थीं. यह ग्रुप Himalayan Glacier tour operators के जरिए यात्रा पर निकला था. बाढ़ के बाद शीतल के बारे में परिवार को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है. परिजन लगातार उनकी तलाश में जुटे हैं और स्थानीय स्तर पर मदद लेने की कोशिश कर रहे हैं.

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मुंबई में बाबुलनाथ मंदिर के पास रहने वाले शीतल के कजिन सिद्धार्थ कुवावाला ने बताया कि उनके पास शीतल के बैग में लगे ट्रैकर से जुड़ी जानकारी है. इसके जरिए उनकी आखिरी लोकेशन पासांग ल्हामू में मिली थी. यह वही इलाका है, जिसे बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में बताया जा रहा है.

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राखी भेजकर गई थीं शीतल, कजिन ने अब लगाई मदद की गुहार

सिद्धार्थ ने बताया कि शीतल ने 21 अगस्त को उन्हें राखी भेजी थी. वह आज भी अपनी बहन की भेजी हुई भगवान शिव की राखी पहने हुए हैं. रक्षाबंधन के लिए भेजी गई इस राखी से जुड़ी भावुक याद के बीच परिवार अब शीतल की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहा है.

उन्होंने बताया कि शीतल के पति चेतन टेनेसी में हैं और अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं. वहीं शीतल के भाई अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहने के लिए बड़ौदा पहुंच गए हैं. परिवार के सदस्य अलग-अलग जगहों से उनकी जानकारी जुटाने और तलाश में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.

सिद्धार्थ के मुताबिक शीतल ने यात्रा शुरू करने से पहले अपने बुजुर्ग माता-पिता को कुछ दिनों के लिए काठमांडू बुलाया था. इसके बाद उनके माता-पिता वापस बड़ौदा लौट गए. परिवार को उस समय अंदाजा नहीं था कि इसके बाद शीतल से संपर्क टूट जाएगा और उन्हें उनकी सलामती को लेकर इस तरह चिंता करनी पड़ेगी.

परिवार ने रेस्क्यू में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल की अपील की

सिद्धार्थ ने बताया कि परिवार को फिलहाल शीतल के ठिकाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. उन्होंने उन भारतीयों से भी संपर्क साधा है, जो शीतल की जानकारी लेकर नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए पहुंचे हैं. परिवार को उम्मीद है कि स्थानीय रेस्क्यू टीमों और वहां मौजूद लोगों की मदद से शीतल का पता लगाया जा सकेगा.

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उन्होंने कहा कि सर्च ऑपरेशन को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए पर्यटकों के बीच satellite phones और आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल जरूरी है. उनके मुताबिक ऐसी आपदा की स्थिति में अगर यात्रियों से संपर्क के लिए तकनीकी साधनों का बेहतर उपयोग हो तो लापता लोगों की लोकेशन पता करने और राहत टीमों तक जानकारी पहुंचाने में आसानी हो सकती है.

फिलहाल, परिवार शीतल की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है. उनके पति अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य नेपाल और भारत में उपलब्ध माध्यमों से जानकारी जुटा रहे हैं. बाढ़ से प्रभावित पासांग ल्हामू में मिली आखिरी लोकेशन के आधार पर शीतल की तलाश परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है.

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