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छत्रपति संभाजी नगर

छत्रपति संभाजी नगर

छत्रपति संभाजी नगर

छत्रपति संभाजी नगर (Chhatrapati Sambhaji Nagar), जिसे पहले औरंगाबाद के नाम से जाना जाता था, महाराष्ट्र का एक प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर है. 2023 में शहर का नाम बदलकर मराठा साम्राज्य के वीर योद्धा छत्रपति संभाजी महाराज के सम्मान में छत्रपति संभाजीनगर रखा गया. दक्कन क्षेत्र के केंद्र में स्थित यह शहर न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता, हस्तशिल्प और खानपान भी यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.

छत्रपति संभाजीनगर का इतिहास कई शासकों की गाथाओं से भरा है. मध्यकाल में यह क्षेत्र मुगल शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा. इसी दौर में यहां की दो विश्वप्रसिद्ध धरोहरें, अजंता और एलोरा की गुफाएं वैश्विक मानचित्र पर उभरीं. एलोरा की कैलाश मंदिर गुफा को विश्व की सबसे बड़ी मोनोलिथिक संरचनाओं में गिना जाता है, जबकि अजंता की बौद्ध गुफाएं अपनी अद्भुत भित्तिचित्रों और मूर्तिकला के लिए जानी जाती हैं.

शहर में बिबी का मकबरा, जिसे ‘छोटा ताजमहल’ कहा जाता है, पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है. इसके अलावा दौलताबाद किला, पंचक्की, हिमरू शॉल उद्योग, और पैठणी साड़ियां यहां की सांस्कृतिक पहचान हैं. छत्रपति संभाजीनगर को "गेटवे टू मराठवाड़ा" भी कहा जाता है, क्योंकि यह इस क्षेत्र का प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र है.

तेजी से विकसित हो रहा यह शहर आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक विरासत का बेहतरीन मेल है. औद्योगिक क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान और बढ़ती कनेक्टिविटी इसे महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में शामिल करते हैं.

अपनी ऐतिहासिक महिमा, सांस्कृतिक विविधता और पर्यटन महत्व के कारण छत्रपति संभाजीनगर हर तरह से एक अनोखा और जीवंत शहर है, जो भारत की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने गर्व से प्रस्तुत करता है.
 

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