तेलंगाना से नवजात बच्चों की गैर-कानूनी खरीद-फरोख्त का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. पुलिस ने एक 12 दिन के नवजात लड़के को सुरक्षित बचाया है, जिसे बिचौलियों के जरिए 1.7 लाख रुपए में एक बेऔलाद दंपत्ति को बेच दिया गया था. चाइल्ड वेलफेयर डिपार्टमेंट की जांच के बाद इस मामले का खुलासा हुआ है.
पुलिस के अनुसार, एक नवजात की गैर-कानूनी बिक्री और ट्रांसफर की पक्की सूचना मिलने के बाद चाइल्ड वेलफेयर विभाग ने पूरे मामले की आधिकारिक जांच शुरू की थी. इस दौरान कई अहम तथ्य सामने आए, जिसके बाद 9 जून को हैदराबाद के कुलसुमपुरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई. इस एक बेऔलाद दंपत्ति का जिक्र है.
शिकायत के मुताबिक, दंपत्ति करीब 18 वर्षों से संतान सुख से वंचित था. गोद लेने के लिए बच्चे की तलाश कर रहा था. इसी दौरान उनका संपर्क कुछ बिचौलियों से हुआ, जिन्होंने उन्हें एक नवजात बच्चा दिलाने का भरोसा दिया. जांच में पता चला कि बच्चे का जन्म 28 मई को तुक्कुगुडा स्थित एक निजी अस्पताल में हुआ था. नवजात एक लड़का था.
वो जन्म से ही शारीरिक विकलांगता के साथ पैदा हुआ था. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चे के जैविक माता-पिता ने उसे एक महिला बिचौलिये को सौंपने पर सहमति दे दी थी. यह महिला बच्चे के जैविक पिता की रिश्तेदार बताई गई है. इसके बाद बिचौलियों ने पूरे सौदे की व्यवस्था कर दी. नवजात को उस दंपत्ति तक पहुंचा दिया गया.
पुलिस के मुताबिक, बच्चे को बेऔलाद दंपत्ति को सौंपने के बदले 1.7 लाख रुपए का भुगतान किया गया. यह रकम दोनों पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते के तहत दी गई थी. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा लेन-देन और बच्चे का ट्रांसफर पूरी तरह गैर-कानूनी तरीके से किया गया. गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों का पालन नहीं हुआ.
किसी भी वैधानिक प्रक्रिया को अपनाए बिना बच्चे को एक परिवार से दूसरे परिवार तक पहुंचा दिया गया. इस मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई की. पुलिस ने करीब 12 दिन के नवजात लड़के को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया. बचाव के बाद बच्चे को 'शिशु विहार' में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है.