निफ्टी क्लब में शामिल होने के पहले दिन, बुधवार के कारोबार में बीएसई लिमिटेड के शेयरों में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी में भारत की 50 सबसे बड़ी कंपनियां शामिल हैं, जिनका चयन पिछले छह महीनों में उनके औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर किया गया है. शामिल करने से पहले ट्रेडिंग लिक्विडिटी मानदंड भी लागू किए जाते हैं. इस स्टॉक को विप्रो की जगह पर शामिल किया गया है.
निफ्टी50 में एंट्री के बाद बुधवार को, बीएसई के शेयर 3.68 प्रतिशत गिरकर एनएसई पर 3,085.20 रुपये प्रति शेयर के निचले स्तर पर पहुंच गए, जबकि एक दिन पहले इनमें 3.31 प्रतिशत की तेजी आई थी. इस साल अब तक शेयर में 18.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है. आज गिरावट की वजह वॉल्यूम में गिरावट की आशंका और ब्रोकरेज फर्म्स ने रेटिंग घटाई है.
शेयर पर बड़ा टारगेट
इस शेयर का टारगेट 3,787.68 रुपये था, जिसका मतलब है कि इसमें 18.4 प्रतिशत की और बढ़ोतरी की संभावना दिख रही है. बीएसई के इस शेयर ने निफ्टी इंडेक्स में तब प्रवेश किया जब इसका छह महीने का औसत फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन 1,40,879 करोड़ रुपये था. मैक्वेरी ने हाल ही में बीएसई को 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग देते हुए 4,000 रुपये का टारगेट दिया है.
मैक्वेरी ने 24 सितंबर को कहा था कि हमारा 4,000 रुपये का टारगेट वित्त वर्ष 2029 के प्रति शेयर के 40 गुना, +1 एसडी (3-वर्षीय औसत) पर बेस्ड है, जो भारत की वित्तीयकरण यात्रा, बाजार की स्थिति बीएसई की बढ़ती प्रासंगिकता और कैश इक्विटी/डेरिवेटिव्स में शेयर लाभ उचित ठहराया गया है.
गिरावट की आशंका
बर्नस्टीन ने बीएसई पर 2,820 रुपये का टारगेट तय किया है, जो शेयर पर उसके 'अंडरपरफॉर्म' नजरिए को दिखाता है. वहीं, जेपी मॉर्गन ने 3,950 रुपये के लक्ष्य के साथ 'ओवरवेट' रेटिंग दी है. हैतोंग इंटरनेशनल ने इस महीने बीएसई पर 4,060 रुपये का लक्ष्य सुझाया है. एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने 'ऐड' रेटिंग के साथ बीएसई पर 3,850 रुपये का लक्ष्य सुझाया है.
मैक्वेरी ने अपने नोट में कहा कि बीएसई के प्लेटफॉर्म विस्तार और शेयरों में हुई बढ़ोतरी से राजस्व और मार्जिन के विकल्प उत्पन्न होते हैं, जो मजबूत कैश को सपोर्ट करते हैं. मैक्वेरी ने कहा कि हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-30 के दौरान बीएसई के राजस्व में 16 प्रतिशत की सीएजीआर बढ़ोतरी होगी, जो इक्विटी की ग्रोथ और कैश इक्विटी और एफ एंड ओ में संबंधित शेयर लाभ से सर्पोटिव है.स्मार्ट ऑर्डर रूटिंग (एसओआर) को अपनाने, उच्च प्रीमियम-टू-नोशनल (पी/एन) अनुपात और मासिक विकल्पों में आकर्षण के कारण वैकल्पिक संभावनाएं मौजूद हैं.
वित्त वर्ष 2026 में बीएसई का ईबिटडीए मार्जिन 65.7 प्रतिशत तक पहुंच गया, और मैक्वेरी को उम्मीद है कि इंडेक्स ऑप्शंस और गैर-लेनदेन राजस्व में वृद्धि के कारण वित्त वर्ष 2030 तक यह 70 प्रतिशत के करीब पहुंच जाएगा.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)