महाराष्ट्र विधानपरिषद चुनाव में महाविकास आघाडी ने पांच में से तीन सीटें जीत लीं और महायुती को सिर्फ दो सीटें मिलीं. नागपुर ग्रेजुएट्स सीट पर बीजेपी लगातार दूसरी बार हारी. संभाजीनगर और पुणे ग्रेजुएट सीट शरद पवार की एनसीपी ने जीती. पुणे की दो सीटों पर बीजेपी और शिंदे की शिवसेना में विवाद शुरू हो गया है.
नागपुर ग्रेजुएट्स सीट पर बीजेपी के सुधाकर कोहले, बागी अनिल सोले, कांग्रेस के अभिजित वंजारी और निर्दलीय नितेश कराले ने नामांकन भरा. मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोले के घर जाकर उन्हें मनाया, तो मुकाबला कोहले, वंजारी और कराले के बीच रहा. वंजारी को पहली और दूसरी पसंद के कुल 67 हजार 231 वोट मिले और उन्होंने कोहले को 3271 वोटों से हराया. कोहले को 63 हजार 960 वोट मिले. यह सीट बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गढ़ रही है. करीब 50 साल यहां बीजेपी जीती. 1978 से 1988 तक फडणवीस के पिता गंगाधरराव यहां से चुने गए. उसके बाद 1990 से लगातार 24 साल नितिन गडकरी जीतते रहे. फिर अनिल सोले जीते, लेकिन 2020 में वंजारी ने यह सिलसिला रोका और अब 2026 में फिर जीते. सत्ता में रहकर भी सीट न बचा पाना फडणवीस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
अमरावती शिक्षक सीट महायुती के कोटे में शिंदे की शिवसेना को मिली. उसने 2020 के विजेता किरण सरनाईक को उतारा, पर पार्टी के श्रीकांत देशपांडे ने बगावत कर दी. महाविकास आघाडी में यह सीट कांग्रेस को मिली और उसने देशोन्नती मीडिया समूह के प्रकाश पोहरे की बहू अदिती पोहरे को उतारा. कड़े मुकाबले की उम्मीद थी, लेकिन सरनाईक को 16 हजार 663 और पोहरे को 8 हजार 636 वोट मिले. बगावत से शिवसेना को कोई नुकसान नहीं हुआ.
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छत्रपति संभाजीनगर सीट अजित पवार की एनसीपी के हिस्से आई. सतीश चव्हाण यहां लगातार तीन बार जीत चुके थे और फिर उम्मीदवार बने. शरद पवार की एनसीपी ने प्रतापसिंह पाटील को उतारा और युवा यूट्यूबर रविराज साबळे भी मैदान में थे. चव्हाण को 67 हजार 752 वोट मिले, जबकि पाटील को 85 हजार 876 वोट मिले और उन्होंने बड़ी जीत हासिल की.
पुणे शिक्षक सीट पर बीजेपी ने 30 साल के कौस्तुभ गावडे को उतारा. वे विवेकानंद शिक्षण प्रसारक मंडल बनाने वाले बापूजी सालुंके के पोते हैं और उनके पीछे संस्था की बड़ी ताकत थी. कांग्रेस के जयंत आसगावकर महाविकास आघाडी के उम्मीदवार थे. शिंदे की शिवसेना ने निर्दलीय सचिन सानप को समर्थन दिया, जिससे बीजेपी नाराज हुई, पर नतीजे पर असर नहीं पड़ा. गावडे भारी वोटों से जीते. उन्हें 23 हजार 117 और सानप को 13 हजार 347 वोट मिले. शिंदे के इस कदम पर बीजेपी की नाराजगी बनी रही.
पुणे ग्रेजुएट सीट पर बीजेपी ने पुढारी मीडिया के मालिक प्रतापराव जाधव की बहू स्मिता जाधव को उतारा. शरद पवार की एनसीपी ने हर्षदा जाधव को खड़ा किया, जिनके पिता आईएएस रह चुके हैं और शरद पवार के करीबी रहे हैं. शिवसेना नेता रविंद्र धंगेकर ने बीजेपी उम्मीदवार के खिलाफ खुला रुख लिया. उन्होंने पुढारी मीडिया के चुनावी कामकाज पर आपत्ति जताई और सोशल मीडिया पर स्मिता जाधव को हराने की अपील की. स्मिता को 1 लाख 3 हजार 912 और हर्षदा को 1 लाख 13 हजार 840 वोट मिले. इससे बीजेपी नेता नाराज हैं और सुबह से शिंदे की शिवसेना से जवाब मांग रहे हैं.