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ChatGPT पर गंभीर आरोप! परिवार का दावा- AI की सलाह के बाद बेटी की हुई मौत

ChatGPT मेकर OpenAI पर एक परिवार ने केस कर दिया है. आरोप है कि ChatGPT ने मिर्गी की दवा बंद करने की सलाह दी जिससे विक्टिम की मौत हो गई.

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OpeAI पर लगे गंभीर आरोप
OpeAI पर लगे गंभीर आरोप

एक 31 साल की महिला की मौत के बाद उनके माता-पिता ने ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI और उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. परिवार का आरोप है कि ChatGPT ने उनकी बेटी को मिर्गी की दवा की खुराक कम करने और डॉक्टरों से इस बदलाव को छिपाने में मदद की. परिवार का कहना है कि दवा कम करने के बाद उनकी बेटी की मौत हो गई.

यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसमें सवाल सिर्फ A की गलती का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि जब लोग किसी चैटबॉट को अपनी सेहत से जुड़े फैसलों के लिए भरोसेमंद मानने लगते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी कहां तक होनी चाहिए. हालांकि, ये परिवार की ओर से लगाए गए आरोप हैं. 

कौन थीं बोवेन वान, ChatGPT से क्यों लेने लगीं सलाह?

मुकदमे के मुताबिक, बोवेन वान एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं और काफी पहले से उन्हें मिर्गी की बीमारी थी. वह कई साल से इस बीमारी को मैनेज के लिए दवा ले रही थीं. रिपोर्ट्स के अनुसार, वह अमेरिका में Amazon में काम करती थीं.

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परिवार की शिकायत में कहा गया है कि नौकरी जाने की चिंता और आने वाले जॉब इंटरव्यू को लेकर वह परेशान थीं. उन्हें लगता था कि उनकी दवा के कारण बोलने और सोचने की क्षमता पर असर पड़ रहा है. इसी चिंता के बीच उन्होंने ChatGPT से दवाओं और उनकी खुराक को लेकर सवाल पूछने शुरू किए.

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ChatGPT ने किया ब्रेनवॉश?

परिवार का आरोप है कि चैटबॉट ने धीरे-धीरे उन्हें डॉक्टर की सलाह से अलग जाकर दवा कम करने के रास्ते पर आगे बढ़ाया. मुकदमे में यह भी कहा गया है कि ChatGPT ने दवा कम करने की योजना बनाने और इस बारे में डॉक्टरों को न बताने की सलाह दी. इन आरोपों का आधार महिला और चैटबॉट के बीच हुई बातचीत के रिकॉर्ड बताए गए हैं. 

ChatGPT ने दवा कम करने का प्लान बनाया?

परिवार की शिकायत के मुताबिक, बोवेन वान मिर्गी की दवा लैमोट्रिजीन ले रही थीं. मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि ChatGPT ने उनकी रोज की 400 मिलीग्राम खुराक को करीब 25 दिनों में घटाकर जीरो तक लाने का शेड्यूल तैयार किया.

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परिवार का कहना है कि यह बदलाव डॉक्टर की मंजूरी के बिना किया गया. शिकायत में यह भी आरोप है कि जब महिला ने डॉक्टरों की सलाह को लेकर संदेह जताया, तो चैटबॉट ने उनके संदेह को दूर करने के बजाय डॉक्टरों पर भरोसा कम करने वाली बातें कहीं.

मुकदमे के अनुसार, ChatGPT ने उन्हें डॉक्टरों से दवा घटाने की योजना छिपाने के लिए भी कहा. परिवार का दावा है कि इस वजह से डॉक्टर उनकी स्थिति और दवा के स्तर में हो रहे बदलाव का सही अंदाजा नहीं लगा पाए.

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तबीयत बिगड़ने पर भी चिंता दूर करता रहा चैटबॉट?

परिवार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि दवा कम करने के दौरान बोवेन वान को भ्रम, समय का पता न चलना और दूसरी परेशानियां महसूस हुईं. उनका दावा है कि ChatGPT ने कुछ लक्षणों को दवा कम करने के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव की तरह समझाया और उन्हें ज्यादा चिंता न करने को कहा.

परिवार के मुताबिक, महिला ने कई बार अपनी परेशानी और डर के बारे में चैटबॉट से बात की थी. इसके बावजूद चैटबॉट की प्रतिक्रियाओं ने उन्हें दवा कम करने की योजना जारी रखने के लिए भरोसा दिया.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी 2026 में बोवेन वान की मौत हो गई. बाद में उन्हें उनके अपार्टमेंट में मृत पाया गया. मेडिकल एग्जामिनर ने मौत का कारण मिर्गी से जुड़ी अचानक मौत बताया, जिसे चिकित्सा जगत में Sudden Unexpected Death in Epilepsy यानी SUDEP कहा जाता है.

परिवार का आरोप है कि दवा कम करने की योजना ने उनकी मौत में भूमिका निभाई. हालांकि, मौत के कारण और कंपनी की कानूनी जिम्मेदारी पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है.

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OpenAI ने क्या कहा?

OpenAI ने इस मामले को बेहद दुखद बताया है. कंपनी ने कहा है कि यह मामला ChatGPT के पुराने मॉडल GPT-4o से जुड़ा था. कंपनी के मुताबिक, नए मॉडल ऐसे हालात को पहचानने में बेहतर हैं, जहां किसी व्यक्ति को तत्काल मदद या पेशेवर सहायता की जरूरत हो सकती है.

क्या ChatGPT या कोई भी AI डॉक्टर की जगह ले सकता है?

इस मामले से आम यूजर्स के लिए एक अहम सवाल निकलता है. ChatGPT जैसे एआई टूल किसी बीमारी के बारे में सामान्य जानकारी समझने, मेडिकल रिपोर्ट में लिखे शब्दों का मतलब जानने या डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवाल तैयार करने में मदद कर सकते हैं. लेकिन किसी व्यक्ति की बीमारी, पुरानी दवाओं और मेडिकल हिस्ट्री को समझकर इलाज का फैसला करना अलग बात है.

मिर्गी जैसी बीमारी में दवा की खुराक अपने आप घटाना या दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है. दवा में बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है. अगर किसी दवा से बोलने, सोचने या रोजमर्रा के काम में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से बात करके विकल्प तलाशना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है.

यही सावधानी दूसरी बीमारियों और दवाओं के मामले में भी जरूरी है. एआई आत्मविश्वास के साथ जवाब दे सकता है, लेकिन आत्मविश्वास से दिया गया जवाब हमेशा सही या किसी खास मरीज के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं.

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