महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. मराठा समुदाय के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में उनके अनशन का आज तीसरा दिन है.
पिछले तीन सालों के दौरान मनोज जरांगे का ये 11वां आंदोलन है. मनोज जरांगे की मुख्य मांग मराठा समुदाय को 'कुणबी' प्रमाण पत्र देने की है, ताकि उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत आरक्षण आसानी से मिल सके.
इस बीच, राज्य सरकार की मराठा आरक्षण उपसमिति के सदस्य जरांगे की मांगों पर विचार कर रहे हैं और जल्द ही उनसे बातचीत करने की तैयारी में हैं.
क्या हैं जरांगे पाटिल की प्रमुख मांगे?
मनोज जरांगे ने सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं:
58 लाख दस्तावेजों का पूरा गणित
मुंबई में हुए पिछले आंदोलन के बाद सरकार ने हैदराबाद गजट लागू करने का आदेश दिया था. इसके तहत मराठा-कुणबी और कुणबी-मराठा रिकॉर्ड तलाशने के लिए जस्टिस संदीप शिंदे के नेतृत्व में एक समिति बनाई गई थी. सरकार के मुताबिक, समिति ने अब तक 58 लाख दस्तावेज खोज निकाले हैं.
हालांकि, इन दस्तावेजों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है. जरांगे पाटिल का दावा है कि ये सभी 58 लाख दस्तावेज पूरी तरह से नए हैं. वहीं, सरकार की ओर से अभी तक ये साफ नहीं किया गया है कि इसमें 1967 से लेकर अब तक जारी किए गए पुराने दस्तावेज भी शामिल हैं या नहीं.
12 सितंबर से मुंबई में प्रदर्शन की चेतावनी
अनशन के बीच मनोज जरांगे ने एक बार फिर मुंबई के आजाद मैदान में बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने समर्थकों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सभी आंदोलक 12 सितंबर 2026 से पहले मुंबई पहुंच जाएं और वहां अपने रिश्तेदारों या परिचितों के यहां ठहरें.
उन्होंने अपील की कि जब तक वो खुद मुंबई नहीं पहुंच जाते, तब तक कोई भी समर्थक सीधे आजाद मैदान या मुख्यमंत्री आवास की तरफ नहीं जाएगा और न ही सड़कों पर उतरेगा.
एकनाथ शिंदे और सांसद संजय जाधव पर साधा निशाना
इससे पहले, परभणी में शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद संजय जाधव के आयोजित किसानों की जनसभा का जरांगे ने कड़ा विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि जब मराठा समाज अपनी मांगों के लिए अनशन कर रहा है, तब ऐसी राजनीतिक जनसभाएं बुलाने का कोई मतलब नहीं है.
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जरांगे ने सभा में एकनाथ शिंदे के आने पर खुद परभणी जाने की चेतावनी दी थी. हालांकि, बाद में उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया, लेकिन सांसद जाधव का राजनीतिक करियर खत्म करने की चेतावनी देते हुए शिंदे सरकार पर जमकर हमला बोला.