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अमेरिका में 'किलिंग फील्ड्स'... जहां लड़कियों को मारकर फेंक जाते थे, दशकों बाद खुल रहा राज

का दृश्य जितना सुंदर और सुरम्य लगता है. लेकिन, इस जमीन के नीचे कई मासूम जिंदगियां असमय दफन हो गई. यही वजह है कि इसे टेक्सास किलिंग फील्ड्स कहा जाता है.

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टेक्सास में एक ऐसी जगह है जहां से दशकों तक महिलाओं की लाश मिलती रही (Photo - Pexels)
टेक्सास में एक ऐसी जगह है जहां से दशकों तक महिलाओं की लाश मिलती रही (Photo - Pexels)

अमेरिका के टेक्सास में एक ऐसी जगह है, जिसका नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. बाहर से देखने पर यह इलाका हरे-भरे घास के मैदान जैसा लगता है, लेकिन इसी जमीन के नीचे दशकों तक कई परिवारों का दर्द दफन रहा. यहां एक-दो नहीं, बल्कि कई युवतियों और लड़कियों के शव बरामद हो चुके हैं. इसी वजह से इस इलाके को 'टेक्सास कीलिंग फिल्ड्स' कहा जाने लगा.

टेक्सास के लीग सिटी में कैल्डर रोड के पास करीब 25 एकड़ का सुनसान इलाका है. साल 1984 से 1991 के बीच यहां चार युवतियों के शव मिले थे. लेकिन यह कहानी सिर्फ इन चार महिलाओं तक सीमित नहीं है. 1970 के दशक से ह्यूस्टन और गैल्वेस्टन के बीच हाईवे- 45 कॉरिडोर में करीब 30 महिलाओं और लड़कियों के शव मिलने के मामले सामने आ चुके हैं.

इन मामलों ने दशकों तक पुलिस और पीड़ित परिवारों को परेशान किया. कुछ पीड़ितों की पहचान तक नहीं हो पाई थी. हालांकि, आधुनिक DNA तकनीक और जेनेटिक जेनेलॉजी की मदद से वर्षों बाद कुछ परिवारों को अपने अपनों के बारे में सच्चाई पता चली. अब इस पुराने मामले में एक आरोपी को कोर्ट का सामना करना पड़ रहा है.

16 साल की लॉरा, जो घर लौटकर नहीं आई
इस कहानी की सबसे कम उम्र की पीड़ितों में से एक थी - लॉरा लिन मिलर. वह सिर्फ 16 साल की थी और हाई स्कूल में पढ़ती थी. उसका सपना सिंगर बनने का था. वह गंभीर दौरे यानी सीजर्स की समस्या से भी जूझ रही थी, जिसकी वजह से उसे सामाजिक और पढ़ाई से जुड़ी परेशानियां होती थीं.

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सितंबर 1984 में लॉरा एक स्थानीय कन्वीनियंस स्टोर के पास देखी गई थी. परिवार हाल ही में पास के डिकिंसन से लीग सिटी आया था और घर का फोन अभी कनेक्ट नहीं हुआ था.

लॉरा ने अपने बॉयफ्रेंड को फोन करने के लिए पेफोन जाने की इजाजत मांगी. उसकी मां उसे पेफोन तक छोड़कर आईं. योजना थी कि लॉरा वहां से करीब आधा मील पैदल चलकर घर लौट आएगी.लेकिन वह कभी घर नहीं पहुंची. शुरुआत में पुलिस ने उसे फरार होने का मामला माना. परिवार को भरोसा दिलाया गया कि वह जल्द फोन करेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 

करीब डेढ़ साल बाद, 2 फरवरी 1986 को दो लड़के इसी सुनसान मैदान से साइकिल पर गुजर रहे थे. उन्होंने वहां दो महिलाओं के शव देखे. उनमें से एक लॉरा थी. उसके शव की पहचान दांतों के रिकॉर्ड के जरिए हुई. दूसरी महिला की पहचान उस वक्त नहीं हो सकी. वह करीब 33 साल तक 'जेन डो' के नाम से जानी गई.

दूसरी महिला की पहचान में लगे 33 साल
जिस दूसरी महिला का शव लॉरा के पास मिला था, वह ऑड्री ली कुक थी. वह 30 साल की थी और ह्यूस्टन की कई कंपनियों में मैकेनिक के तौर पर काम कर चुकी थी. दिसंबर 1985 में उसके गायब होने के बाद परिवार को लंबे समय तक पता नहीं चला कि उसके साथ क्या हुआ. ऑड्री को मोटरसाइकिल चलाना और कैंपिंग करना पसंद था. इसलिए जब उसने परिवार को चिट्ठियां भेजना बंद किया तो रिश्तेदारों को लगा कि शायद वह किसी यात्रा पर गई है.

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लेकिन परिवार की तलाश तीन दशक से ज्यादा समय तक जारी रही. आखिरकार 2016 से 2019 के बीच आधुनिक DNA जांच और जेनेटिक जेनेलॉजी की मदद से 'जेन डो' की पहचान ऑड्री ली कुक के रूप में हुई.

1991 में फिर मिला एक महिला का शव
इस इलाके में शव मिलने का सिलसिला यहीं नहीं रुका. 8 सितंबर 1991 को दो लोग घोड़ों पर सवार होकर इस मैदान से गुजर रहे थे. इसी दौरान उन्हें एक महिला का शव मिला. पुलिस के सामने फिर वही सवाल था—यह महिला कौन है और उसकी मौत कैसे हुई? उस समय उसकी पहचान नहीं हो सकी. वह लगभग 28 साल तक 'जेनेट डो' के नाम से जानी गई. बाद में DNA तकनीक और जेनेटिक जेनेलॉजी की मदद से पता चला कि वह डोना प्रूडहोम थीं.

डोना 34 साल की थीं और दो बच्चों की मां थीं. उनकी जिंदगी भी मुश्किलों से भरी रही. उनकी बहन के मुताबिक, उनके पहले पति के साथ रिश्ता हिंसक था. इसके बाद डोना अपने दो बेटों के साथ वहां से चली गईं. बाद में एक और रिश्ता खत्म हुआ तो उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई.

उन्होंने अपने बच्चों को उनकी दादी के पास छोड़ा और टेक्सास के क्लियर लेक में अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करने की कोशिश की. 1989 के बाद परिवार का उनसे संपर्क टूट गया. करीब 30 साल तक उनकी तलाश जारी रही. 2019 में परिवार को पता चला कि 1991 में मिले शव की पहचान डोना प्रूडहोम के रूप में हो चुकी है.

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एक के बाद एक चार शव, लेकिन जवाब नहीं
लीग सिटी के इस मैदान में 1984 से 1991 के बीच चार युवतियों के शव मिले. इनमें हेइडी फाई भी शामिल थीं. वह 25 साल की थीं और बारटेंडर के तौर पर काम करती थीं. हेइडी 1983 में एक स्थानीय कन्वीनियंस स्टोर के पास आखिरी बार देखी गई थीं. बाद में उनकी मौत से जुड़ा एक चौंकाने वाला सुराग सामने आया. 6 अप्रैल 1984 को एक पड़ोस का कुत्ता इंसानी हड्डियों के कुछ हिस्से अपने घर तक ले आया. जांच के बाद पुलिस ने आसपास के जंगलों में तलाशी ली और हेइडी के बाकी अवशेष बरामद किए.

एक ही इलाके में अलग-अलग समय पर महिलाओं के शव मिलने से यह जगह जांच एजेंसियों के लिए बेहद अहम बन गई. लेकिन लंबे समय तक परिवारों को यह पता नहीं था कि उनके अपनों के साथ आखिर हुआ क्या था.

अब 61 साल के आरोपी पर चलेगा मुकदमा
दशकों बाद इस मामले में एक नया मोड़ आया है. 61 साल के जेम्स डॉल्फ्स एलमोर जूनियर पर लॉरा मिलर की मौत में भूमिका निभाने और दोनों शवों को ठिकाने लगाने में मदद करने का आरोप है. उसके खिलाफ एक हत्या और सबूतों से छेड़छाड़ के दो गंभीर आरोप हैं. उसके मामले में अब ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है और जूरी का चयन किया जाना है.

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एलमोर पर लगे आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं. इस मामले में सबसे भावुक गवाहों में लॉरा के पिता टिम मिलर के होने की उम्मीद है. टिम अब 79 साल के हैं और उन्होंने अपनी बेटी के कातिल की तलाश में अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा लगा दिया. बेटी के कातिल की तलाश करते-करते दूसरों की मदद शुरू कर दी. अपनी बेटी के मामले में दशकों तक जवाब नहीं मिलने के बावजूद टिम मिलर ने हार नहीं मानी.

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उन्होंने अपने दर्द को दूसरों की मदद में बदल दिया और एक गैर-लाभकारी संस्था शुरू की, जिसने हजारों परिवारों को उनके लापता परिजनों की तलाश में मदद की. लेकिन अपनी बेटी के मामले में न्याय अब तक दूर था. फिर उनकी जिंदगी में जेम्स एलमोर जूनियर नाम का एक शख्स आया. अब एलमोर के खिलाफ चलने वाला मुकदमा यह तय करने में अहम हो सकता है कि लॉरा की मौत के मामले में आखिर किसकी क्या भूमिका थी.

'टेक्सास किलिंग फील्ड्स' का खौफ क्यों नहीं मिटा?
लीग सिटी के ये मैदान आज भी इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि यहां मिले शवों ने अमेरिका के सबसे लंबे और रहस्यमय अपराध मामलों में से एक को जन्म दिया. यहां की घास और शांत माहौल उस डरावने इतिहास को आसानी से छिपा देता है, लेकिन जमीन के नीचे मिले मानव अवशेषों ने कई परिवारों को दशकों तक जवाब का इंतजार कराया.

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कुछ परिवारों को DNA तकनीक की वजह से अपने अपनों की पहचान मिल गई. अब उनकी उम्मीद अदालत से जुड़ी है कि वर्षों पुराने इन मामलों में कम से कम कुछ पीड़ितों को न्याय मिल सके.

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