महाराष्ट्र के मुंबई प्रेस क्लब में बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई. इस दौरान फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ( FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने खाद्य पदार्थों की क्वालिटी और खुले तेल की बिक्री को लेकर अपनी बात रखी.
FDA कमिश्नर ने कहा कि लोगों को यह समझना जरूरी है कि वे क्या खरीद रहे हैं और क्या खा रहे हैं. उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ खरीदते समय ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
उन्होंने कहा कि लोग त्योहारों के समय कपड़े और दूसरी चीजें खरीदते हैं. इस दौरान दुकानदार से कई सवाल भी पूछे जाते हैं. इसी तरह खाने-पीने की चीजों को लेकर भी सवाल पूछे जाने चाहिए. लोग पैकेट पर निर्माण की तारीख, एक्सपायरी डेट और सामान किस तरह तैयार किया गया है, इसकी जानकारी जरूर देखें.
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'खुले तेल पर नया आदेश नहीं'
खुले तेल की बिक्री को लेकर मुंढे ने कहा कि यह कोई नया निर्देश नहीं है. यह नियम साल 2011 से लागू है. इसके पीछे पुराना मामला भी है. 1988 में नई दिल्ली में तेल में मिलावट के कारण करीब 40 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद इस तरह की बिक्री और मिलावट को लेकर सख्त नियम बनाए गए.
FDA कमिश्नर ने बताया कि नियम में राज्यों को कुछ समय के लिए छूट देने का प्रावधान था. महाराष्ट्र में यह छूट 2020 में खत्म हो गई. इसके बाद अब लागू नियम के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने साफ किया कि यह केंद्र सरकार का आदेश है. इस विषय पर केंद्रीय सलाहकार समिति में भी कई बार चर्चा हो चुकी है.
मुंढे ने खुले तेल की परिभाषा को लेकर भी स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि जब किसी पैकेट को खोल दिया जाता है तो उसके बाद तेल खुले तेल की श्रेणी में आ जाता है. तेल नियमों के अनुसार पैक होना चाहिए. इसमें किसी तरह की मिलावट नहीं होनी चाहिए.
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उन्होंने बताया कि 200 मिलीलीटर के छोटे पैकेट भी उपलब्ध हैं. गरीब लोगों को ध्यान में रखते हुए ऐसे पैकेट बाजार में मौजूद हैं. इसलिए यह कहना सही नहीं है कि नियम के कारण गरीब लोगों को नुकसान होगा.
मुंढे ने खाद्य और दवा क्षेत्र में हुई कार्रवाई का भी आंकड़ा शेयर किया. उन्होंने बताया कि 31 जुलाई तक खाद्य क्षेत्र से जुड़े 3500 से ज्यादा प्रतिष्ठानों की जांच की गई. वहीं करीब 3100 दवा प्रतिष्ठानों का भी निरीक्षण किया गया.
उन्होंने बताया कि जुलाई के आखिर तक 165 लाइसेंस निलंबित किए गए थे. इनमें से करीब 100 मामलों में अपील की गई. जुलाई और अगस्त के पहले हफ्ते में करीब 70 मामलों में राहत दी गई. बाकी मामलों में अंतिम आदेश के अनुसार कार्रवाई जारी है.
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'नियम नहीं मानने पर रद्द होगा लाइसेंस'
मुंढे ने कहा कि निलंबन के बाद दोबारा जांच की जाती है. सुनवाई होती है. अगर संबंधित प्रतिष्ठान नियमों का पालन करता है तो निलंबन हटाया जा सकता है. लेकिन नियमों का पालन नहीं करने पर लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 32 की उपधारा 3 के तहत जन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लाइसेंस तत्काल निलंबित करने का प्रावधान है. निरीक्षण और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कार्रवाई की जाती है. प्रोसेस को लेकर अधिकारियों को भी साफ निर्देश दिए गए हैं.
मुंढे ने कहा कि उनका प्रयास अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाने का है. खाद्य सुरक्षा केवल सरकार या अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है. उपभोक्ताओं को भी जागरूक और सतर्क रहना होगा. खाने-पीने की चीजों को बिना सवाल किए खरीदने के बजाय उसकी गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जानकारी लेना जरूरी है.