अभी भी बहुत सी चीजें हैं जिन्हें मैं हासिल करना चाहती हूं... डॉली पार्टन का यह बयान उनकी मौत से महज चार दिन पहले का है. 80 साल की भली-पूरी जिंदगी जीने, 3000 गाने लिखने और 11 ग्रैमी अवॉर्ड जीतकर उपलब्धियों का एक एवरेस्ट खड़ा करने के बाद उनका ये बयान बहुत कुछ बयां करता है. वह दुनिया की सबसे मशहूर कंट्री सिंगर थीं, हजारों गीत लिख चुकी थीं, करोड़ों रिकॉर्ड बेच चुकी थीं. सिंगर, एक्ट्रेस, राइटर, फिलांथ्रोपिस्ट एक साथ कई भूमिकाएं निभाते हुए डॉली बहुत उत्सुकता से कहती थीं कि मैंने खुद को इतने सपनों में उलझा दिया है कि मैं तब तक काम करूंगी, जब तक उन सपनों को हकीकत में बदलते हुए देखने का मौका मिलता रहेगा. पर 25 अगस्त को डॉली पार्टन इस दुनिया से रुखसत हो गईं.
डॉली का जाना इसलिए ज्यादा खलता है क्योंकि जिस उम्र में ज्यादातर लोग पीछे मुड़कर अपनी उपलब्धियां गिनते और गिनाते हैं, वह आगे देख रही थीं. वह रुकना नहीं चाहती थीं. उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि वह पहले की तरह लंबे टूर नहीं करेंगी लेकिन संगीत और मंच से रिश्ता खत्म करने का उनका कोई इरादा नहीं था. वह नैशविल में एक बड़ा शो शुरू करने की योजना बना रही थीं. किसी सुपरवुमेन की तरह कैंसर का मजबूती से सामना करती हुईं मौत के इतने करीब खड़ी होकर भी भविष्य की योजना बनाने में मशगुल थीं.
डॉली पार्टन का सफर अमेरिका के टेनेसी की उन पहाड़ियों के बीच शुरू हुआ था, जहां एक बेहद गरीब परिवार में 12 बच्चों के बीच पली एक लड़की ने सपने देखना शुरू किया. 19 जनवरी 1946 को जन्मी डॉली के परिवार के पास पैसे नहीं थे, लेकिन संगीत था. उन्होंने छोटी उम्र में गीत लिखना शुरू किया और किशोरावस्था तक स्थानीय रेडियो कार्यक्रमों में गाने लगीं. 13 साल की उम्र में उन्होंने ओपरा में परफॉर्म किया और हाईस्कूल खत्म करने के बाद अपना हुनर लेकर नैशविल चली गईं. वहां से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें धीरे-धीरे दुनिया की सबसे बड़ी संगीत हस्तियों के बीच ले आया.

बेहद गरीबी के बीच पली-बढ़ी डॉली कभी अपनी गरीबी को लेकर शर्मिंदा नहीं हुईं. वह अपनी जड़ों को अपने साथ लेकर चलीं. उनके गीतों में गरीब परिवारों की जिंदगी, मां की ममता, प्रेम, बिछड़न, ईर्ष्या और छोटे शहरों के सपने दिखाई देते रहे. Coat of Many Colors में उनका अपना बचपन था. Jolene में प्रेम खोने का डर और I Will Always Love You में बिछोह की पीड़ा. सफलता मिलने के बाद भी डॉली ने खुद को सिर्फ गायिका नहीं रहने दिया. उन्होंने अभिनय किया, फिल्में कीं, कारोबार खड़ा किया. Dollywood बनाया और अपनी संगीत की विरासत को एक बड़े साम्राज्य में तब्दील कर दिया. उनका बेहद फेमस 9 to 5 गाना कामकाजी महिलाओं की मुश्किलों को बयां करता है. लेकिन इस पूरी यात्रा में उन्होंने एक चीज कभी नहीं छोड़ी, अपनी शर्तों पर जीने की आदत.
डॉली की शख्सियत का सबसे दिलचस्प हिस्सा उनकी अपनी छवि के साथ उनका रिश्ता था. बड़े सुनहरे बाल, चमकदार कपड़े, ऊंची हील्स, भारी मेकअप और विग. डॉली हमेशा ब्लॉन्ड विग पहना करती थीं. वह खुद जानती थीं कि लोग उनके लुक पर बातें करेंगे लेकिन उन्होंने उस मजाक को कभी अपने खिलाफ नहीं होने दिया. बल्कि वह सबसे पहले खुद पर हंसती थीं. उनके लिए विग उनकी पहचान का हिस्सा बन गई थी. वह अपने बालों और ग्लैमर को लेकर बिल्कुल संकोची नहीं थीं. डॉली का साफ कहना था कि अगर दुनिया आपको किसी खास तरीके से देखना चाहती है तो क्यों न उसी छवि को अपने नियंत्रण में लेकर अपनी ताकत बना लिया जाए?

वह अपनी खूबसूरती को लेकर भी किसी बनावटी गंभीरता में नहीं रहती थीं. डॉली को पता था कि उनका लुक आम लोगों की नजर में सामान्य नहीं है लेकिन उन्होंने उसे ही अपनी पहचान बना लिया. वह मजाक करती थीं कि उनके बड़े बालों और चमकदार कपड़ों के पीछे असली डॉली से ज्यादा एक ऐसा किरदार है जिसे उन्होंने खुद बनाया है लेकिन उस चमक के पीछे जबरदस्त मेहनत थी. वह खुद को Show horse जैसी दिखने वाली Workhorse कहती थीं. बाहर से जितनी चमकदार, भीतर से उतनी ही मेहनती.
उनकी जिंदगी के फैसलों में यह आत्मविश्वास बार-बार दिखाई देता है. जब उन्हें लगा कि अब अपना रास्ता खुद बनाना है. उन्होंने अपने पुराने पेशेवर रिश्तों से अलग होने का जोखिम उठाया. I Will Always Love You जैसे गीत के राइट्स को लेकर भी उन्होंने समझौता नहीं किया. बाद में यही गीत व्हिटनी ह्यूस्टन की आवाज में दुनिया के सबसे मशहूर गीतों में शामिल हुआ.
उनकी निजी जिंदगी भी उनकी सार्वजनिक छवि से बिल्कुल अलग थी. पति कार्ल डीन के साथ उनका रिश्ता करीब छह दशक तक चला. कार्ल बेहद निजी इंसान थे और डॉली की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते थे. 2025 में उनके निधन के बाद डॉली ने माना कि उन्होंने पति की देखभाल करते हुए अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. आखिरी इंटरव्यू में उन्होंने इसी बात का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें खुद की हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन उस समय उनका ध्यान कार्ल पर था.

कार्ल की मौत ने डॉली के जीवन में एक बड़ा खालीपन छोड़ा, लेकिन उन्होंने दुख को भी काम में बदलने की कोशिश की. उनके लिए काम सिर्फ करियर नहीं था. वह जीने का तरीका था. उन्होंने खुद को व्यस्त रखा, नए प्रोजेक्ट्स पर काम किया और उम्र को कभी अपने सपनों के आड़े नही आने दिया. शायद इसीलिए मौत से चार दिन पहले भी वह अतीत की उपलब्धियों पर बात करने के बजाय भविष्य की योजनाएं बता रही थीं.
डॉली की शोहरत का दूसरा पहलू उनकी दरियादिली थी. उन्होंने अपनी संपत्ति और प्रसिद्धि को सिर्फ अपने लिए नहीं रखा. उनकी Imagination Library ने बच्चों तक मुफ्त किताबें पहुंचाने का बड़ा अभियान चलाया. उनके लिए पढ़ना और शिक्षा सिर्फ सामाजिक काम नहीं, उनके अपने बचपन की कमी को पूरा करने का तरीका था. जिस लड़की ने गरीबी में बचपन बिताया था, वही आगे चलकर लाखों बच्चों के हाथों में किताबें पहुंचाने वाली महिला बनी.
कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में भी जब पूरी दुनिया अनिश्चितता के भंवर में झूल रही थी. डॉली पार्टन ने कोरोना वैक्सीन के डेवलपमेंट के लिए तकरीबन दस लाख डॉलर दान किए. यह रकम उन्होंने वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्च फंड को दिए, जिसका इस्तेमाल बाद में मॉडर्ना की कोविड-19 वैक्सीन के शुरुआती रिसर्च में हुआ.
और शायद यही डॉली की सबसे बड़ी खूबी थी. वह जितनी बड़ी होती गईं, उतना ही बड़ा उनका दिल होता गया. वह सिर्फ शोबिज स्टार नहीं थीं. वह उन लोगों की उम्मीद भी थीं जिन्हें लगता है कि गरीबी बड़े सपनों की राह के आड़े आ सकते हैं.
अमेरिकी पॉलिटिकल हिस्ट्री में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों कद्दावर पार्टियां डॉली पार्टन की लोकप्रियता को हमेशा भुनाने में लगी रहीं. उनकी लोकप्रियता, उनकी सहज छवि और सबसे बढ़कर आम अमेरिकी से उनका जुड़ाव ऐसा था कि दोनों पार्टियां अपने-अपने तरीके से उन्हें अपने पक्ष में खड़ा दिखाना चाहती रहीं.
डेमोक्रेट उन्हें समावेशी, उदार और आम लोगों के करीब अमेरिका की तस्वीर के तौर पर देखते रहे, तो रिपब्लिकन खेमे के लिए वह पारंपरिक अमेरिकी मूल्यों, मेहनती और छोटे शहरों की संस्कृति से जुड़ी एक बेहद लोकप्रिय शख्सियत थीं. डॉली ने हालांकि इस राजनीतिक खींचतान से खुद को काफी हद तक दूर रखा. यही उनकी दिलचस्प बात थी कि अमेरिका की राजनीति उन्हें अपने खांचे में फिट करना चाहती थी, लेकिन डॉली किसी एक खांचे की होकर नहीं रहीं.

डॉली खुद को कभी बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लेती थीं. वह अपनी विग पर मजाक कर सकती थीं, अपने ग्लैमर पर हंस सकती थीं. अपनी उम्र को लेकर चुटकी ले सकती थीं और उसी सांस में अपने काम और अधिकारों को लेकर बेहद गंभीर हो सकती थीं. यही विरोधाभास उन्हें खास बनाता था. उनके भीतर एक ऐसी लड़की हमेशा जिंदा रही, जिसने टेनेसी के छोटे से घर से निकलकर दुनिया को जीतने का सपना देखा.
और आज जब वह नहीं है तो उनके आखिरी वाक्य उनकी जिंदगी का सबसे सटीक सार बनकर हमारे सामने हैं कि अभी बहुत सी चीजें हैं जिन्हें हासिल करना है. बहुत से सपने हैं, जिन्हें पूरा करना है. यह एक ऐसी महिला के शब्द थे, जिन्होंने लगभग सबकुछ हासिल कर लिया था. स्टारडम तो जीवन में लोगों को मिलता रहेगा, पर डॉली जैसा दिल कहां मिलेगा?