महाराष्ट्र की बॉम्बे हाईकोर्ट ने पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने चेतावनी दी कि अगर पटाखे अनियंत्रित तरीके से फोड़े जाते रहे, तो शहर गैस चैंबर में बदल सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि त्योहार मनाने के नाम पर नागरिकों के साफ और स्वस्थ वातावरण में जीने के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की पीठ ने गुरुवार को पारित आदेश में मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में प्रदूषण, धुंध और स्मॉग पर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि दिवाली से पहले ही मुंबई के कुछ इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स ( AQI) 425 तक पहुंच गया था.
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए नियम और कानून मौजूद हैं, लेकिन हालात में खास सुधार नहीं हो रहा है. लोगों को लगातार पर्यावरण प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है.
कोर्ट ने पटाखों के सामूहिक इस्तेमाल के असर पर भी चिंता जताई. पीठ ने कहा कि जब हजारों लोग एक साथ पटाखे फोड़ते हैं, तो उससे निकलने वाला धुआं, जहरीले पदार्थ और अन्य उत्सर्जन पहले से मौजूद प्रदूषण को और बढ़ा सकते हैं. राज्य की एजेंसियों ने पटाखों के सामूहिक इस्तेमाल से होने वाले कुल प्रभाव पर पर्याप्त अध्ययन नहीं किए हैं. इससे लोगों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है.
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' आर्टिकल 21 के तहत साफ वातावरण में जीने का अधिकार'
हाईकोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 21 का जिक्र करते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में साफ और स्वस्थ वातावरण में जीने का अधिकार भी शामिल है. अदालत ने कहा कि किसी नागरिक को यह अधिकार नहीं है कि वह दूसरे नागरिकों के मौलिक अधिकारों को नुकसान पहुंचाए. राज्य की जिम्मेदारी है कि शहरों को प्रदूषण मुक्त और रहने लायक बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए.
पीठ ने नागरिकों से भी अपील की कि वे शहरों में रहने के लंबे समय के खतरों को समझें और प्रदूषण कम करने में अपनी भूमिका निभाएं. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि 22 सितंबर के उसके आदेश का दायरा केवल गणपति उत्सव तक सीमित नहीं है. यह आदेश महाराष्ट्र में पूरे साल और सभी त्योहारों पर लागू होगा.
कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी रोक दोहराई. इसके साथ ही साइलेंस जोन में भी पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है. इनमें अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, अदालतों और स्कूलों के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं.
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हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार, नगर निगमों और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक हफ्ते के अंदर जागरूकता व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है. इसमें स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करने और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, सार्वजनिक परिवहन तथा दूसरे माध्यमों से लोगों को जागरूक करने की बात कही गई है. कोर्ट ने लोगों को कम उत्सर्जन वाले ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और तय समय सीमा का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है.
शिकायत व्यवस्था और निगरानी के भी निर्देश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अधिकारियों को पटाखों से जुड़े नियमों के उल्लंघन की शिकायत के लिए स्पेशल व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है. नियम लागू कराने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने को भी कहा गया है, ताकि अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बना रहे.
कोर्ट ने फील्ड स्टाफ को डेसिबल मीटर और प्रदूषण मापने वाले दूसरे उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर तुरंत कार्रवाई की जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी. अदालत ने अपने निर्देशों के जरिए प्रदूषण पर नियंत्रण, नागरिकों की सेहत और साफ वातावरण में जीने के अधिकार को अहम बताया है.