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टमाटर के दाम गिरे, 'लाल सोना' मिट्टी में मिला! किसान ने 4 एकड़ फसल उखाड़ी

क्या किसी किसान के लिए उससे भी ज्यादा दर्दनाक कुछ हो सकता है, जब 4 एकड़ की मेहनत खेत में खड़ी हो और बाजार उसे कौड़ियों के भाव भी न पूछे? महादेव कराड की कहानी आज बीड़ जिले के हजारों किसानों की जंग बनकर सामने आई है, जहां बारिश की बेरुखी और मंडी के गिरते दामों ने उम्मीदों पर सीधा वार किया है.

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बीड़ के किसान ने टमाटर उखाड़ने का लिया फैसला.(Photo:ITG)
बीड़ के किसान ने टमाटर उखाड़ने का लिया फैसला.(Photo:ITG)

एक तरफ बारिश की बेरुखी और दूसरी तरफ कृषि उपज के कौड़ियों के भाव बिकने के दोहरे संकट में बीड़ जिले का किसान बुरी तरह पिस रहा है. अंबाजोगाई तहसील के हणमंतवाड़ी गांव के किसान महादेव कराड पर बाजार में उचित दाम न मिलने के कारण अपने चार एकड़ में खड़े टमाटर की फसल को उखाड़कर फेंकने की नौबत आ गई है.

बीड जिले के हणमंतवाड़ी के किसान महादेव कराड पर टमाटर के दामों में आई भारी गिरावट के कारण अपनी 4 एकड़ में खड़ी टमाटर की फसल उखाड़कर फेंकने की नौबत आ गई है. खेती में करीब 2 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें 4 एकड़ से महज 40 हजार रुपये की ही कमाई हो सकी.

शुरुआत में टमाटर का भाव 200 रुपये प्रति कैरेट मिल रहा था, लेकिन अचानक यह गिरकर 80 रुपये प्रति कैरेट (लगभग 4 रुपये प्रति किलो) पर आ गया. इतने कम दाम में फसल की तुड़ाई और मंडी तक परिवहन (ट्रांसपोर्ट) का खर्च निकालना भी नामुमकिन हो गया. इस कारण किसान को बची हुई फसल खेत में ही उखाड़ देने का कड़ा फैसला लेना पड़ा. चिंता की बात यह है कि फसल उखाड़ने के लिए भी मजदूरों पर 30 हजार रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त खर्च आ रहा है.

2 लाख रुपये का निवेश करने के बाद हाथ में सिर्फ 40 हजार रुपये आना और ऊपर से फसल नष्ट करने का अतिरिक्त खर्च झेलना—कराड दोहरे संकट में फंस गए हैं. इसी मजबूरी में उन्होंने अपनी मेहनत से उगाई फसल को नष्ट करने का यह दुखद कदम उठाया है. देखें VIDEO:- 

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मद (विवरण) - राशि (रुपये में)

कुल लागत खर्च (4 एकड़)- ₹2,00,000

प्राप्त आय (दाम ₹200 से ₹80/कैरेट गिरने के बाद)- ₹40,000

फसल उखाड़ने का मजदूरी खर्च- ₹30,000

शुद्ध आर्थिक नुकसान -₹1,90,000


एक तरफ बारिश न होने से सोयाबीन सूख रहा है, तो दूसरी तरफ टमाटर के दाम नहीं मिल रहे हैं. बाजार में दालों और चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन किसान की उपज को कौड़ियों के भाव बेचा जा रहा है. सरकार को सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देना चाहिए. बीमा और सब्सिडी के केवल दावे किए जा रहे हैं, हकीकत में हाथ कुछ नहीं आ रहा, यह आक्रोशित प्रतिक्रिया किसान महादेव कराड ने व्यक्त की. अब अगली फसल के लिए उनके पास फिर से कर्ज लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.

किसान महादेव कराड ने बताया कि पौधे लगाने में 40 से 42 हजार का खर्च आया, कीटनाशक छिड़काव पर 50 हजार खर्च हुए. तोड़ाई और बाजार तक ले जाने समेत कुल 2 लाख का खर्च आया, जबकि हाथ में सिर्फ 40,000 आए. इसमें से भी फसल को हटाने के लिए महिला मजदूरों को 30,000 देने पड़े. उन्होंने मांग की कि जैसे सरकार प्याज के लिए आधार मूल्य तय करती है, वैसे ही टमाटर के लिए भी समर्थन मूल्य तय किया जाना चाहिए.

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